
धन्यवाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी
वैसे तो मैं सत्ता विरोधी पत्रकार हूँ। मेरी लेखनी हमेशा सत्ता से प्रश्न पूछती है, चाहे सत्ता किसी भी दल या व्यक्ति की क्यों न हो। पत्रकार का धर्म ही यही है कि वह जनपक्ष में खड़ा रहे और हर सत्ता को आईना दिखाता रहे।
परंतु आज पहली बार ऐसा लगा कि राजनीति से ऊपर उठकर किसी निर्णय ने मन को भीतर तक स्पर्श किया है। धार की पवित्र धरती पर माँ वाग्देवी अर्थात माँ सरस्वती के लिए “सरस्वती लोक” एवं “राजा भोज शोध संस्थान” निर्माण की आपकी घोषणा केवल एक प्रशासनिक घोषणा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और आत्मगौरव के पुनर्जागरण का उद्घोष है।
धार केवल एक शहर नहीं है। यह भारत की बौद्धिक चेतना का वह केंद्र रहा है जहाँ राजा भोज जैसे महान विद्वान शासक ने ज्ञान, साहित्य, कला और संस्कृति को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की थीं। इतिहास के पन्नों में राजा भोज का नाम केवल एक राजा के रूप में नहीं, बल्कि एक दार्शनिक, साहित्यकार, वास्तुकार और संस्कृति पुरुष के रूप में दर्ज है। कहा जाता है कि उनके समय में धार नगरी ज्ञान की राजधानी हुआ करती थी।
आज जब आपने कहा कि “माँ वाग्देवी के आशीर्वाद से धार पुरातत्व और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा यहाँ माता सरस्वती लोक एवं राजा भोज शोध संस्थान का निर्माण किया जाएगा।”तो यह केवल एक वाक्य नहीं था, बल्कि उन करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान था जो भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को जीवित देखना चाहते हैं।
हाल ही में भोजशाला को लेकर आए ऐतिहासिक निर्णयों और उससे जुड़ी सांस्कृतिक चर्चाओं के बीच यह घोषणा और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। वर्षों से लोग माँ वाग्देवी की उस विरासत को पुनः प्रतिष्ठित देखने का सपना संजोए हुए थे। ऐसे समय में सरकार का यह संकल्प समाज के सांस्कृतिक आत्मविश्वास को मजबूत करता दिखाई देता है।
मैं राजनीति का अंध समर्थन करने वालों में कभी नहीं रहा। मैंने सरकारों की गलत नीतियों पर प्रश्न भी उठाए हैं और आगे भी उठाऊँगा। क्योंकि पत्रकारिता मेरे लिए किसी दल का मंच नहीं, बल्कि जनभावनाओं का दर्पण है। लेकिन जब कोई सरकार संस्कृति, शिक्षा, ज्ञान और विरासत के संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम उठाती है, तो उसका स्वागत करना भी उतना ही आवश्यक हो जाता है।
आज आवश्यकता केवल सड़क, भवन और घोषणाओं की नहीं है। आज आवश्यकता भारत की आत्मा को पुनर्जीवित करने की है। हमारी आने वाली पीढ़ियाँ यदि अपने इतिहास, अपने महापुरुषों और अपनी ज्ञान परंपरा से कट जाएँगी, तो विकास केवल भौतिक रह जाएगा, आत्मिक नहीं।
माँ सरस्वती केवल एक देवी नहीं हैं, वे ज्ञान, विवेक, कला और चेतना की प्रतीक हैं। जिस प्रदेश की धरती पर महाकाल हैं, जहाँ राजा भोज की स्मृतियाँ हैं, जहाँ विक्रमादित्य की परंपरा है, वहाँ यदि माँ वाग्देवी के नाम पर एक भव्य सांस्कृतिक एवं शोध केंद्र बनता है तो यह पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय होगा।
आपकी यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान समय में राजनीति अधिकतर तात्कालिक लाभों तक सीमित होती जा रही है। ऐसे दौर में यदि कोई सरकार संस्कृति, इतिहास और बौद्धिक विरासत को केंद्र में रखकर निर्णय लेती है तो वह सामान्य राजनीति से अलग दिखाई देती है।
एक पत्रकार होने के नाते मैं इतना अवश्य कहूँगा कि जनता केवल भाषण नहीं, भावनाओं का सम्मान भी याद रखती है। और धार में माँ सरस्वती के सम्मान में लिया गया यह निर्णय निश्चित रूप से जनमानस में अपनी जगह बनाएगा।
ईश्वर करे कि यह घोषणा केवल कागज़ों तक सीमित न रहे बल्कि शीघ्र ही धरातल पर उतरे और धार वास्तव में भारतीय संस्कृति, पुरातत्व, शोध एवं पर्यटन का वैश्विक केंद्र बने।
माँ वाग्देवी आप पर अपनी कृपा बनाए रखें।
आपको सद्बुद्धि, संवेदना और जनकल्याण के ऐसे ही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करें।
आपका
ठा. राजेन्द्र सिंह जादौन
9893894536
@highlight CM Madhya Pradesh BJP Madhya Pradesh


