
“नकारात्मकता कुछ नहीं होती, यह सिर्फ मन की सोच है”
एमसीयू में आनंदित शिक्षक बनने की कार्यशाला के दूसरे दिन सकारात्मक सोच पर जोर
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि में ए जॉयफुल एजुकेटर पर तीन दिवसीय कार्यशाला का दूसरा दिन ध्यान और साँसों के नियन्त्रण से आरंभ हुआ।
भोपाल. जब तक एक शिक्षक अपनी सोच सकारात्मक नहीं रखेगा वह अपने आसपास के वातावरण, अपने विद्यार्थियों की ऊर्जा नहीं बढ़ा पाएगा। इसलिए जरूरी है हम चीज़ों को देखने का नजरिया बदलें। हैदराबाद के रेखी फ़ाउंडेशन के प्रोफ़ेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉ श्रीहरि कृष्ण ने इस विषय पर विस्तृत विचार साझा किए।
संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के रेखी सेंटर आफ़ एक्सीलेंस फ़ॉर साइंस आफ़ हैप्पीनैस ने किया है। इसमें विवि के शिक्षकों के साथ ही अतिथि शिक्षक भी भाग ले रहे हैं। सीनियर फ़ैकल्टी डॉ. रीतू शर्मा ने उदाहरणों और कहानियों के माध्यम से विषय की गहराई को सहभागियों के समक्ष रखा। वीडियो और स्लाइड के माध्यम से डॉ.हरि ने बताया हर बार कुछ ऐसा घटित होता है जो हमारे मन को अच्छा नहीं लगता तो हमारी सोच यही होती है कि मेरे साथ ही क्यूँ ऐसा हो रहा है लेकिन परिस्थितियों को देखने का नजरिया यदि हम बदलें तो हम खुशी के करीब रहेंगे। द्वितीय दिवस के द्वितीय सत्र में कुछ अभ्यास कराए गए जिसमें प्रतिभागियों से प्रश्न किए गए कि वे अपने अंदर की विशेषताएं जैसे समानुभूति (empathy), रचनात्मकता, हास्यबोध, धैर्य, जिज्ञासा,नेतृत्व क्षमता का उपयोग किस तरह करते हैं।


