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    Rajkumar Singh Dhanora पर भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने कार्रवाई की थी, अब Arunoday Choubey की बारी?

    Rajkumar Singh Dhanora पर भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने कार्रवाई की थी, अब Arunoday Choubey की बारी?

    बंडा शराबकांड में अरुणोदय चौबे की पोस्ट ने खड़े किए सवाल, पृथ्वी सिंह के पलटवार के बाद डिलीट हुई पोस्ट.. भाजपा नेतृत्व के सामने अब अनुशासन की अग्निपरीक्षा

    सागर। भाजपा के भीतर कुछ वर्ष पहले सोशल मीडिया पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने वाले राजकुमार सिंह धनोरा पर पार्टी ने किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष पद से हटाने से लेकर छह वर्ष के निष्कासन तक की कार्रवाई की थी। आज वही गोविंद सिंह राजपूत एक अलग घटनाक्रम में चर्चा के केंद्र में हैं और उनकी ओर से नहीं, बल्कि उनके बचाव में भाजपा से जुड़े पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे ने अपने ही दल के वरिष्ठ नेता भूपेन्द्र सिंह और उनके परिवार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
    फर्क सिर्फ इतना है कि उस समय धनोरा ने गोविंद सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला था, जबकि इस बार चौबे गोविंद सिंह के बचाव में खड़े दिखाई दिए।
    और अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या भाजपा का अनुशासन दोनों मामलों में एक जैसा पैमाना अपनाएगा?

    अरुणोदय चौबे ने पोस्ट डाली, आरोप लगाए और फिर हटा दी..
    बंडा जहरीली शराबकांड को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को घेरने के बाद अरुणोदय चौबे ने उनके बचाव में सोशल मीडिया पोस्ट लिखी।
    चौबे ने दिग्विजय सिंह को जवाब देते हुए शराबकांड के आरोपी सिद्धार्थ कुशवाहा के पारिवारिक संबंधों का हवाला दिया और उसे खुरई विधायक एवं पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह के परिवार से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए।

    पोस्ट सामने आते ही राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। इसके बाद पृथ्वी सिंह ठाकुर ने सार्वजनिक रूप से जवाब देते हुए बताए गए रिश्ते का खंडन किया, आरोपों को निराधार बताया और चौबे को प्रमाण सामने रखने की चुनौती दी। साथ ही पोस्ट नहीं हटाने पर मानहानि सहित कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
    इसके बाद अरुणोदय चौबे की मूल पोस्ट का डिलीट होना इस पूरे घटनाक्रम का नया राजनीतिक सवाल बन गया।

    एक पोस्ट… और कई सवाल
    सोशल मीडिया पर अब सवाल उठ रहा है कि इतनी गंभीर बात सार्वजनिक रूप से लिखने के पीछे आखिर आधार क्या था? यदि आरोपों के पीछे ठोस प्रमाण थे तो पोस्ट हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि प्रमाण नहीं थे तो एक पूर्व विधायक ने ऐसे आरोप सार्वजनिक मंच पर क्यों लगाए?

    कुछ सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं में यह अटकल भी लगाई जा रही है कि अरुणोदय चौबे ने यह पोस्ट किसी राजनीतिक प्रेरणा या इशारे पर की। इन चर्चाओं में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की ओर भी संकेत किए जा रहे हैं।
    हालांकि, यह प्रमाणित नहीं है कि चौबे ने किसी के कहने पर पोस्ट की थी या इसमें मंत्री गोविंद सिंह की कोई भूमिका थी।
    लेकिन राजनीतिक रूप से इतना जरूर है कि चौबे ने जिस नेता का बचाव किया, उसी पोस्ट में भाजपा के दूसरे वरिष्ठ नेता भूपेन्द्र सिंह और उनके परिवार को कठघरे में खड़ा कर दिया।

    गोविंद सिंह और भूपेन्द्र सिंह की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता..
    सागर जिले की राजनीति में गोविंद सिंह राजपूत और भूपेन्द्र सिंह के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता किसी से छिपी नहीं है। दोनों नेताओं से जुड़े राजनीतिक समर्थकों और रिश्तेदारों के नाम जब भी किसी विवादित मामले में सामने आते हैं, तो आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो जाता है।

    बंडा शराबकांड में भी यही तस्वीर देखने को मिली..
    शराबकांड के मुख्य आरोपी बताए जा रहे चंदू राजा को गोविंद सिंह राजपूत से जोड़ने की कोशिश किए जाने के बाद स्वयं गोविंद सिंह और उनके पुत्र आकाश राजपूत ने सामने आकर स्पष्ट किया कि चंदू राजा से उनका कोई रिश्ता नहीं है।
    इसके बाद दूसरी दिशा में शराबकांड के आरोपी सिद्धार्थ कुशवाहा को भूपेन्द्र सिंह के परिवार से जोड़कर सवाल उठाए गए। अब पृथ्वी सिंह ठाकुर ने सामने आकर इसका खंडन किया है।
    यानी एक ही शराबकांड में आरोपियों के रिश्तों को लेकर दोनों राजनीतिक खेमों की ओर उंगलियां उठीं और दोनों तरफ से स्पष्टीकरण भी सामने आए।

    चौबे की राजनीति ने बढ़ाई कहानी की दिलचस्पी..
    अरुणोदय चौबे और गोविंद सिंह राजपूत के राजनीतिक संबंध भी इस घटनाक्रम को सामान्य बयान से अलग बनाते हैं। चौबे के कांग्रेस से भाजपा में आने के पीछे गोविंद सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है और दोनों के बीच पुराने विश्वासपूर्ण संबंध बताए जाते हैं।
    ऐसे में चौबे का गोविंद सिंह के बचाव में उतरना एक राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
    लेकिन इसके साथ ही उन्होंने जिस तरह सिद्धार्थ कुशवाहा के संबंधों का हवाला देकर पृथ्वी सिंह और उनके परिवार को घेरा, उससे भूपेन्द्र सिंह बनाम अरुणोदय चौबे का पुराना राजनीतिक संघर्ष भी फिर चर्चा में आ गया है।
    अब भाजपा के सामने असली सवाल
    यहीं से राजकुमार सिंह धनोरा का पुराना मामला फिर याद आता है।
    राजकुमार सिंह धनोरा ने जब सोशल मीडिया पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए थे, तब भाजपा ने इसे गंभीरता से लिया। उन्हें किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष पद से हटाया गया, जवाब मांगा गया और बाद में छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया।
    आज धनोरा कांग्रेस में हैं और सुरखी विधानसभा में गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं।
    अब सवाल यह है कि क्या भाजपा नेतृत्व अरुणोदय चौबे के मामले को भी उसी गंभीरता से देखेगा?
    क्या पार्टी यह पूछेगी कि एक पूर्व विधायक ने अपने ही दल के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह के परिवार को लेकर इतने गंभीर आरोप किस आधार पर लगाए?
    क्या चौबे से उन आरोपों के प्रमाण मांगे जाएंगे?
    और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते तो क्या पार्टी इसे अनुशासनहीनता मानेगी?

    धनोरा के बाद चौबे.. क्या भाजपा का पैमाना वही रहेगा?
    यह पूरा मामला अब सिर्फ अरुणोदय चौबे और पृथ्वी सिंह के बीच विवाद नहीं रह गया है। यह भाजपा के भीतर अनुशासन, गुटीय राजनीति और नेताओं के बीच बदलते समीकरणों की परीक्षा भी बनता जा रहा है।

    एक तरफ भूपेन्द्र सिंह हैं, खुरई के निर्वाचित विधायक, पूर्व गृहमंत्री और सागर जिले में भाजपा के स्थापित एवं वरिष्ठ नेताओं में शुमार। दूसरी तरफ भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे हैं, जिन्होंने उसी पार्टी के वरिष्ठ नेता के परिवार को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
    और तीसरी तरफ मंत्री गोविंद सिंह राजपूत हैं, जिनके बचाव में चौबे खुलकर सामने आए।

    इसलिए अब सबसे बड़ा सवाल शराबकांड से आगे बढ़ चुका है। क्या भाजपा शीर्ष नेतृत्व चौबे की डिलीट हुई पोस्ट को महज सोशल मीडिया की गलती मानकर छोड़ देगा, या फिर राजकुमार सिंह धनोरा के मामले की तरह कोई संगठनात्मक कार्रवाई भी सामने आएगी?

    क्योंकि यदि आरोप गलत थे तो सवाल चौबे की जल्दबाजी पर है… और यदि आरोपों में दम था, तो सवाल यह है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अपने ही वरिष्ठ विधायक के परिवार को लेकर लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है?

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