आज,जनपरिषद का स्थापना दिवस , उनको स्मरण करने का भी दिन है
दोस्तो, आज आपकी अपनी जन परिषद की स्थापना के 37साल पूरे हो गए हैं l भोपाल का कार्यक्रम , तकनीकी कारणों से एवं अतिथियों की सुविधानुसार 23 जून को आयोजित किया गया था l
आज जनपरिषद जिस मुकाम पर है, उसका श्रेय निश्चित रूप से हमारे चेयरमैन एवं पूर्व डीजीपी श्री एन के त्रिपाठी सर की डायनेमिक लीडरशिप , हमारे अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के मार्गदर्शन एवम मेरे दोस्तों की जिंदादिली एवं जुनून को जाता है l
37 वर्ष की यात्रा कम नहीं होती ।
इसलिए आज जब , हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो हमें ऐसे कई मित्रों की याद आती है जो उस समय भीषण गर्मी या ठंड में भी मोटरसाइकिलों पर पूरे आनंद के साथ काम करते रहे और जनपरिषद का झंडा उठाए रहते थे l पर हां उनकी आंखों में एक सपना था, एक जुनून था कि जन परिषद को रचनात्मकता का एक अभूतपूर्व एवं शिखरतम कारवां बनाना है, और कालांतर में यही सपना हम सबकी ताकत बनती गई l
आज एसी कारों में भी जब हमें थकान का एहसास होने लगता है तो वो स्कूटर सर्व मोटरसाइकिल पर घूमने के दिन हमें रोमांचित भी करते हैं और प्रेरित भी l और इसी प्रक्रिया से जन परिषद को और लोग मिलते गए और मिलते जा रहे हैं l और हम भी शनै शनै अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते जा रहे हैं l प्रभु से प्रार्थना करते हुए कि वो अपना आशीर्वाद हम सबको इसी प्रकार प्रदान करते रहें l
संस्था की जो भी उपलब्धियां हैं वे इस मायने में उल्लेखनीय हैं कि संस्था ने जो कुछ अर्जित किया , अपने सदस्यों की मेहनत और लगन से किया l
जबसे जन परिषद के देश भर में 300 और विदेशों में 7 चैप्टर्स बने हैं तबसे हमारी सक्रियता और उपलब्धियों में चार चांद लग गए हैं l सभी चैप्टर्स के प्रति साधुवाद ।
इस लंबी किंतु निष्कलंक यात्रा में , कष्ट भी कम नहीं हुए l हमारे कई समर्पित दोस्त एक के बाद एक , दुनिया छोड़ते गए l
किसी भी दोस्त के जाने पर थोड़ा ठहराव भी आ जाता था , तब हमें मुकेश जी की ये पंक्तियां काफी प्रेरित करती थीं कि , है कौन सा वो इंसान यहां पर जिसने दुख न झेला………..” इस गाने से प्रेरित होकर और उन्हीं मित्रों के सपनों की कसम खाकर हम बाकी लोग फिर आगे बढ़ते रहे l और इसी क्रम में कई नए और बहुत अच्छे अच्छे सहयात्री भी मिलते गए l सबका उल्लेख तो नही किया जा सकता ,लेकिन हां सबके प्रति साधुवाद जरूर व्यक्त करना चाहता हूं l
व्यक्तिगत तौर पर मैं पूरी कोशिश करता हूं कि किसी की भी भावनाओं को आहत न करूं , लेकिन जन परिषद के संयोजक के नाते जाने अनजाने मेरे किसी भी कृत्य से कोई आहत हुआ हो तो मैं हमेशा की तरह क्षमायाचना में भी पीछे नहीं रहता हूं l आज भी में उसी भाव से आप सबको प्रणाम करता हूं l
आज के शुभ दिन की आप सबको अनेक शुभकामनाएं ll सादर
*रामजी श्रीवास्तव*, संयोजक
जन परिषद, भोपाल


