
बरगी डेम में क्रूज़ के कहर का दोषी कौन?
राजेन्द्र सिंह जादौन
बरगी डेम की शांत लहरों पर जब सैर-सपाटे का सपना लेकर लोग क्रूज़ में सवार हुए होंगे, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि वही सैर कुछ ही पलों में खौफनाक हादसे में बदल जाएगी। यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उन सवालों का आईना है, जो हमारी व्यवस्था, प्रशासन और जिम्मेदार लोगों की कार्यशैली पर सीधे खड़े होते हैं।
मैं पेशे से पत्रकार हूँ और साथ ही एडवेंचर गतिविधियों से जुड़ा रहा हूँ। इसलिए यह बात पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि किसी भी वॉटर स्पोर्ट्स या एडवेंचर एक्टिविटी में सबसे पहला नियम होता है प्रकृति का सम्मान और मौसम का आकलन। चाहे आप वॉटर पैरासेलिंग कर रहे हों, हॉट एयर बैलून उड़ा रहे हों या साधारण बोटिंग हर जगह हवा की गति, दिशा और मौसम का मिजाज समझना अनिवार्य होता है।
फिर सवाल यह उठता है कि बरगी डेम में चल रहे क्रूज़ संचालन में यह बेसिक नियम क्यों नजरअंदाज किया गया? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और ऑपरेटरों ने मौसम की स्थिति का आकलन किया था? अगर किया था, तो क्रूज़ को पानी में उतारने का फैसला क्यों लिया गया? और अगर नहीं किया था, तो यह लापरवाही नहीं बल्कि सीधा अपराध है।


