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    13 साल बाद खुली नींद: अवैध कॉलोनाइज़रों को चेतावनी और पटवारियों को फटकार?*

    *13 साल बाद खुली नींद: अवैध कॉलोनाइज़रों को चेतावनी और पटवारियों को फटकार?*

     

    झोला छाप ख़बरी

     

    यदि वास्तव में विधायक रामेश्वर शर्मा ने मंच से अवैध कॉलोनियां काटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है और पटवारियों को भी सीधे तौर पर चेतावनी दी है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह जागृति 13 वर्षों बाद क्यों दिखाई दी?

     

    भोपाल सहित पूरे मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों का जाल एक-दो दिन में नहीं बिछा। इन कॉलोनियों के नक्शे वर्षों तक बनते रहे, प्लॉट बिकते रहे, रजिस्ट्रियां होती रहीं, बिजली-पानी के कनेक्शन लगते रहे और हजारों परिवार वहां बसते चले गए। यदि सब कुछ प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की आंखों के सामने होता रहा, तो फिर जिम्मेदार कौन है? केवल कॉलोनाइज़र, या वह पूरा तंत्र जिसने समय रहते आंखें मूंदे रखीं?

     

    रामेश्वर शर्मा को भाजपा का मजबूत जनाधार वाला नेता माना जाता है। उनके समर्थक उन्हें हिन्दू हृदय सम्राट और जनता का लोकप्रिय नेता कहते हैं। ऐसे में जब वे अवैध कॉलोनियों पर प्रहार की बात करते हैं तो लोगों को उम्मीद भी बंधती है कि शायद अब व्यवस्था में सुधार होगा। लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि जिन अवैध बस्तियों और कॉलोनियों के कारण आज हजारों लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनके निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका क्या थी?

     

    सबसे बड़ा प्रश्न पटवारियों पर गुस्सा दिखाने का भी है। यदि कोई पटवारी गलत कार्य कर रहा था तो क्या उसके खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी? क्या केवल मंच से चेतावनी देना पर्याप्त है या फिर दोषी अधिकारियों पर वास्तविक दंडात्मक कार्रवाई भी होगी? क्योंकि जनता अब भाषणों से ज्यादा परिणाम देखना चाहती है।

     

    वास्तविकता यह है कि अवैध कॉलोनियों का कारोबार बिना प्रशासनिक संरक्षण के लंबे समय तक फल-फूल नहीं सकता। जमीन का रिकॉर्ड, सीमांकन, नामांतरण और अन्य प्रक्रियाएं सरकारी तंत्र से होकर गुजरती हैं। इसलिए केवल छोटे कर्मचारियों को कटघरे में खड़ा कर देने से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती। जिम्मेदारी ऊपर से नीचे तक तय होनी चाहिए।

     

    फिर भी यदि यह अभियान ईमानदारी से शुरू हुआ है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। देर से उठाया गया सही कदम भी गलत नहीं होता। लेकिन इस कार्रवाई की विश्वसनीयता तभी सिद्ध होगी जब केवल भाषण नहीं बल्कि बुलडोजर भ्रष्टाचार पर भी चले, जब केवल पटवारियों को नहीं बल्कि उन प्रभावशाली लोगों को भी जवाबदेह बनाया जाए जिन्होंने वर्षों तक इस व्यवस्था को पनपने दिया।

     

    जनता आज यही पूछ रही है कि अवैध कॉलोनियां रातों-रात नहीं बनीं, फिर 13 साल तक सब कुछ ठीक कैसे चलता रहा? यदि अब नींद खुली है तो अच्छा है, लेकिन जनता को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि यह जागरण चुनावी मौसम का नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार का स्थायी संकल्प है।

     

    देर आए, दुरुस्त आए लेकिन अब केवल चेतावनी नहीं, कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए।

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