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    संपत्ति हड़पने के लिए झूठे मुकदमों में फंसाने पर क्या करें

    ⚡ संपत्ति हड़पने के लिए झूठे मुकदमों में फंसाने पर क्या करें ⚡

     

    # प्रश्न : – एक वकील ने अपने पिता की सारी संपत्ति अपने नाम कराने को लेकर अपने माता पिता पर झूठे मुकदमे कर रखे हैं। पिता की तो सदमे में मृत्यु भी हो चुकी है। सभी बहिन-बहनोई पर 156/3 का मुकद्दमा दायर कर दिया है।

    आपके द्वारा पोस्ट किया गया हाई कोर्ट का निर्णय इन पर भी लागू होना चाहिए।

    इस मामले में पीड़ित लोगों को क्या करना चाहिए ?

    🙏 🙏- धर्मवीर सिंह

     

    # उत्तर : यह अत्यंत संवेदनशील और गंभीर स्थिति है, जहां कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    ऐसे मामले में पीड़ित पक्षों (माता जी, बहनों और बहनोईयों) को रणनीतिक और कानूनी रूप से ये कदम उठाने चाहिए ~

     

    1. 156(3) के मुकदमे से बचाव और कानूनी कार्रवाई ;

    अदालत के समक्ष पक्ष रखना (यदि मामला लंबित है):

    यदि धारा 156(3) [अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत] के तहत आवेदन पर मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई चल रही है, तो अपने वकील के माध्यम से न्यायालय के समक्ष सही तथ्य, पिता की मृत्यु का कारण (मानसिक उत्पीड़न) और संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि रखें।

     

    * हाईकोर्ट से एफआईआर/कार्यवाही रद्द कराना (Quashing) :

    यदि झूठी एफआईआर दर्ज हो चुकी है या मजिस्ट्रेट ने आदेश दे दिया है, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 / CrPC की धारा 482 के तहत उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर कर झूठे मुकदमे को रद्द (Quash) करने की मांग की जा सकती है।

     

    2. माता जी के अधिकार और वरिष्ठ नागरिक अधिनियम ;

    एसडीएम कोर्ट में आवेदन (Senior Citizens Act) :

    माता जी ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत एसडीएम (SDM) / ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

     

    * संपत्ति हस्तांतरण रद्दीकरण व सुरक्षा :

    इस अधिनियम के तहत वरिष्ठ नागरिक को अपनी संपत्ति से बेदखल करने या दबाव बनाकर संपत्ति नाम कराने के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं।

    ट्रिब्यूनल धोखाधड़ी से कराए गए हस्तांतरण को रद्द करने और माता जी को मकान पर कब्जा/सुरक्षा देने का आदेश दे सकता है।

     

    3. सिविल व संपत्ति संबंधी उपाय –

    * बंटवारे का मुकदमा (Partition Suit) :

    पिता की स्व-अर्जित या पैतृक संपत्ति में माता जी और सभी बहनों का कानूनन बराबर का हिस्सा (Hindu Succession Act के तहत) बनता है।

    सिविल कोर्ट में बंटवारे (Partition Suit) और संपत्ति की बिक्री पर रोक (Temporary Injunction/Stay) के लिए केस दायर करें।

     

    * धोखाधड़ी और धमकी की पुलिस शिकायत :

    झूठे दस्तावेज बनाने, मानसिक प्रताड़ना देने और पिता की मृत्यु का कारण बनने के संबंध में माताजी और बहनों की ओर से पुलिस अधीक्षक (SP/Commissioner) को लिखित शिकायत दर्ज कराएं।

     

    4. बार काउंसिल में शिकायत (Professional Misconduct) :

    * चूंकि आरोपी स्वयं एक अधिवक्ता है और अपने पद व कानूनी ज्ञान का दुरुपयोग परिवार को प्रताड़ित करने के लिए कर रहा है, इसलिए उसके खिलाफ संबंधित राज्य बार काउंसिल (State Bar Council) में पेशेवर दुराचार/ कदाचरण (Professional Misconduct) की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

     

    > क्या मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जा चुका है

    या अभी न्यायालय में सुनवाई चल रही है ?

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