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    “भागवत कथा केवल श्रवण नहीं, आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है”

    सादर प्रकाशनार्थ

    “भागवत कथा केवल श्रवण नहीं, आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है”

    कोच फैक्ट्री में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा आध्यात्मिकता, भक्ति और संस्कारों का संदेश
    भोपाल।
    प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में कोच फैक्ट्री परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथावाचक पंडित श्री संतोष दुबे शास्त्री जी ने अपनी मधुर एवं ओजस्वी वाणी से श्रद्धालु भक्तगणों को भागवत कथा का रसपान कराया। कथा के दौरान उन्होंने आध्यात्मिकता, भक्ति, संस्कार एवं नैतिक मूल्यों के महत्व को सहज एवं प्रेरणादायक शब्दों में प्रस्तुत करते हुए सभी को परमात्मा स्मृति में रहने का संदेश दिया।
    इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से बीके सरिता, बीके पारस, बीके किरण एवं बीके सनातन ने पंडित श्री संतोष दुबे शास्त्री जी का ईश्वरीय सौगात एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके सरिता बहन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को परमात्मा शिव का परिचय देते हुए राजयोग मेडिटेशन के महत्व को सरल एवं प्रभावशाली शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परमात्मा स्मृति एवं राजयोग ही जीवन में शांति, शक्ति और सुख का सच्चा आधार है। राजयोग के माध्यम से व्यक्ति मानसिक तनाव से मुक्त होकर आत्मिक शांति एवं सकारात्मकता का अनुभव कर सकता है।
    कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों ने कथा एवं आध्यात्मिक संदेशों का भरपूर लाभ लिया। सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय, शांतिमय एवं आनंदमय बना रहा। सभी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे आत्मिक उन्नति एवं जीवन मूल्यों को जागृत करने वाला प्रेरणादायक कार्यक्रम बताया।

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