
भारत में इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी अनूठी शख्सियत और गहरी समझ के चलते चर्चा का केंद्र बने झुग्गी बस्ती निवासी मोहम्मद इरफ़ान ने हाल ही में ‘लल्लनटॉप’ के दफ्तर का दौरा किया, जहां उनकी सादगी और बेबाक अंदाज ने वहां मौजूद सभी पत्रकारों का दिल जीत लिया। जब इरफ़ान 40 रुपये वाली सामान्य हवाई चप्पल पहनकर दफ्तर के अंदर पहुंचे, तो उन्होंने मासूमियत से पूछा कि क्या वे चप्पल बाहर उतार दें। इस सादगी को देख पत्रकारों ने स्नेह से उन्हें अंदर आने को कहा।
जैसे ही इरफ़ान ने स्टूडियो में कदम रखा, पत्रकारों ने उनके सम्मान में तालियां बजाईं। इस दौरान कई पत्रकारों की आंखें नम हो गईं और माहौल भावुक हो उठा, लेकिन इरफ़ान ने बेहद विनम्रता से कहा कि वह खुद इन पत्रकारों से सीखते हैं और उन्हें बोलने की प्रेरणा यहीं से मिलती है।
एक ऐसी झुग्गी बस्ती में रहने वाले, जहां आम तौर पर लोग रहना पसंद नहीं करते, इरफ़ान अपनी उस दुनिया को ही महल मानकर जिंदगी गुजारते हैं। हालांकि, जब उन्होंने इंटरव्यू देना शुरू किया, तो उनके तर्कों और लॉजिक ने सबको हैरान कर दिया। जिन जटिल मुद्दों और बातों की जानकारी अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे लोगों को नहीं होती, उन्हें इरफ़ान ने बिना किसी हिचकिचाहट के बेहद स्पष्टता से रख दिया।
मुलाकात के दौरान उन्होंने भारत के संविधान की प्रस्तावना और मौलिक अधिकारों पर खुलकर बात की। उन्होंने तार्किक तरीके से यह बताया कि कैसे आज इन अधिकारों की अवहेलना हो रही है और आम नागरिकों का सम्मान घट रहा है। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मोहम्मद इरफ़ान से मुलाकात कर आम आदमी की समस्याओं पर चर्चा की थी, और अब लल्लनटॉप के इस इंटरव्यू ने उनके ज्ञान और संघर्ष को देश के सामने एक मिसाल के रूप में पेश कर दिया है।
नर्गिस बानो ✍️


