
⚖️ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने एक अहम फैसले में कहा कि आत्महत्या से ठीक पहले मृतक द्वारा अपने पिता को भेजे गए WhatsApp मैसेज, जिनमें आरोपियों के नाम दर्ज थे, प्रारंभिक तौर पर ‘मरते समय दिया गया बयान’ (Dying Declaration) माने जा सकते हैं।
इस मामले में अदालत ने तीन आरोपियों की ज़मानत देने से इनकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि मृतक के मोबाइल से मिले WhatsApp संदेश अभियोजन पक्ष के महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हैं और प्रथम दृष्टया आरोपियों की संलिप्तता दर्शाते हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ज़मानत पर सुनवाई के दौरान साक्ष्यों की विस्तृत जांच या मिनी ट्रायल करना आवश्यक नहीं होता। उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों के आधार पर यदि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामला बनता है, तो ज़मानत से इनकार किया जा सकता है।
📌 CASE: Dharmendra v. State of Madhya Pradesh | Cr.A. No. 5816/2026
यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, विशेषकर WhatsApp संदेशों, की कानूनी अहमियत को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
💬 इस फैसले पर आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में ज़रूर बताइए।
👉 ऐसी ही अपडेट्स के लिए हमारे पेज को ज़रूर फॉलो करें और इस पोस्ट को शेयर करें।
#LegalNews #Courtverdicts#HighCourt #IndianLaw #Judiciary


