मुख्यमंत्री जी,
दतिया एक सीट का फैसला नहीं है! यह सत्ता के अहंकार पर जनता के फैसले की मोहर है! यह भी नहीं भूलें कि जनता तुलना अतीत से नहीं, अब आपके वर्तमान शासन से कर रही है!
हार जी हताशा में आप ताज़ा जनादेश से नज़रें चुरा रहे हैं! जबकि, हर चुनाव अपने समय का जनमत होता है! जनता सवाल पूछ रही है, जवाब मांग रही है, विकल्प भी तलाश रही है!
यदि सब इतना ही अच्छा होता, तो सत्ता की पूरी ताकत, पूरा संगठन, पूरा सरकारी तंत्र लगाने के बाद भी BJP Madhya Pradesh क्यों हारती? क्योंकि, चुनाव संसाधनों नहीं, विश्वास से जीते जाते हैं!
सवाल एक सीट की,
हार/जीत का भी नहीं है!
मप्र का ज्वलंत प्रश्न यह है कि,
• सरकार आपकी थी!
• प्रशासन आपका था!
• संसाधन भी आपके थे!
• पैसा/पुलिस आपकी थी!
• केंद्र के कई मंत्री मैदान में थे!
• मप्र के 25 मंत्री दौरे कर रहे थे!
फिर भी जनता Indian National Congress – Madhya Pradesh के साथ खड़ी हो गई! यह Bharatiya Janata Party (BJP) की सामान्य पराजय नहीं, यह उस अहंकार की हार है, जो मानती थी कि जनता का फैसला सिर्फ़ सत्ता तय करेगी!
याद रखिए!
यह उपचुनाव नहीं,
2028 का ट्रेलर है!
पिक्चर अभी बाकी है!
Dr Mohan Yadav


