
यह कहानी मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के देवगांव के रहने वाले संतोष पटेल की है, जिनकी हिम्मत और संघर्ष की दास्तान किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है। एक ऐसा लड़का जो कभी दाने-दाने को मोहताज था, आज पुलिस महकमे में एक ऊंचे मुकाम पर है।
1. #अभावों_से_भरा_बचपन_और_फूस_की_झोपड़ी
संतोष का बचपन पन्ना के घने जंगलों के बीच, एक नदी के किनारे बनी फूस की झोपड़ी में बीता। गरीबी का आलम यह था कि बारिश के दिनों में जितना पानी बाहर नहीं बरसता था, उससे ज्यादा पानी उनकी झोपड़ी के भीतर टपकता था। इस वजह से अक्सर उनकी स्कूल की किताबें भीग जाती थीं। फटे-पुराने कपड़ों में स्कूल जाना उनकी मजबूरी थी। उनके माता-पिता दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करते थे—पिता दूसरों के मकान बनाने का काम (मजदूरी) करते थे और माँ दूसरों के खेतों में हंसिया चलाती थीं।


