
श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ पूज्यपाद जूनापीठाधीश्वर: आचार्यमहामण्डलेश्वर: अनन्तश्रीविभूषित पूज्य गुरुदेव श्रीस्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य आचार्यश्री जी” आज अपने दस दिवसीय इंग्लैंड (यूनाइटेड किंगडम) प्रवास के अंतर्गत लन्दन पधारे।
“हिथ्रो अंतरराष्ट्रीय विमानतल, लन्दन” पर उनके शुभागमन के अवसर पर श्रद्धा, भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम वातावरण दृष्टिगोचर हुआ।
“पूज्य आचार्यश्री” के अभिनन्दन एवं स्वागत के लिए “समन्वय परिवार लंदन”, “समन्वय परिवार लेस्टर”, प्रभु प्रेमी संघ लन्दन, विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधिगण, अनेक गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु विमानतल पर उपस्थित रहे। सभी ने पुष्पगुच्छ एवं पुष्पहार अर्पित कर, वैदिक मंगलमंत्रों तथा स्वस्तिवाचन के मध्य “पूज्य आचार्यश्री” का भव्य एवं गरिमामय स्वागत किया तथा सनातन गुरु-परम्परा के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया।
इस अवसर पर समन्वय परिवार के ट्रस्टी आदरणीय श्री बकुल भाई, आदरणीय श्री अविनाश भाई एवं गीता बहन, आदरणीय श्री जीतू भाई एवं कल्पना जी, आदरणीय श्री सुरेश शर्मा जी, श्री हिमांशु शर्मा जी, श्री प्रणव पंड्या जी, अनीतानाथ जी, योगी परिवार की डॉ. नूपुर जी, सोनू शर्मा जी सहित लन्दन, लेस्टर तथा इंग्लैंड के विभिन्न नगरों से पधारे अनेक श्रद्धालुओं ने “पूज्य आचार्यश्री” का आत्मीय एवं भावपूर्ण स्वागत किया।
“पूज्य आचार्यश्री” के साथ इस सम्पूर्ण प्रवास में “भारत माता मन्दिर-समन्वय सेवा ट्रस्ट” एवं “भारत माता जनहित ट्रस्ट” के सचिव आदरणीय श्री आई.डी. शास्त्री जी तथा “एन्सिएंट हेरिटेज फाउंडेशन, हरिद्वार” के न्यासी आदरणीय श्री रोहित माथुर जी कार्यक्रमों के संयोजन एवं व्यवस्थाओं का दायित्व संभालते हुए निरन्तर साथ रहेंगे।
यह सम्पूर्ण इंग्लैंड प्रवास लोकमंगल, विश्वकल्याण तथा सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार को समर्पित है। सनातन संस्कृति सम्पूर्ण मानवता को “वसुधैव कुटुम्बकम्” की दिव्य भावना से एक परिवार मानती है तथा करुणा, समरसता, नैतिकता, आध्यात्मिकता, पारस्परिक सम्मान और धर्ममय जीवन के आदर्शों को अपने वेदों, उपनिषदों, शास्त्रों एवं ऋषि-परम्परा के माध्यम से सहस्राब्दियों से विश्व को आलोकित करती आई है। “पूज्य आचार्यश्री” का यह प्रवास भी इन्हीं शाश्वत जीवन-मूल्यों के विश्वव्यापी प्रसार का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय सिद्ध होगा।
विमानतल पर उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने आशीर्वचनों से अनुगृहीत करते हुए “पूज्य आचार्यश्री” ने अपने परम पूज्य ब्रह्मलीन गुरुदेव भगवान् श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ अनन्तश्रीविभूषित पूज्यपाद श्रीस्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज का अत्यन्त श्रद्धा एवं भावविह्वल स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि “आप सभी मेरे पूज्य ब्रह्मलीन गुरुदेव के अनन्य भक्त, अनुरागी, अनुयायी एवं शिष्य हैं। आपने वर्षों से इस पावन भूमि पर अपने श्रेष्ठ आचरण, संस्कार, सेवा और समर्पण के माध्यम से सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परम्परा को अक्षुण्ण बनाए रखा है। यद्यपि आपका निवास इंग्लैंड में है, किन्तु भारत आपकी चेतना, संस्कारों और हृदय की प्रत्येक धड़कन में स्पंदित होता है। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक दृष्टि और जीवन-मूल्य आपके व्यक्तित्व, व्यवहार एवं जीवन-पद्धति में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। यही भारत की वास्तविक शक्ति है और यही सनातन संस्कृति की वैश्विक पहचान भी है।”
आशीर्वचन के उपरान्त “पूज्य आचार्यश्री” विमानतल से अपने निर्धारित कार्यक्रमों हेतु नगर की ओर प्रस्थान कर गए।
आगामी दिनों में लंदन, लेस्टर तथा इंग्लैंड के विभिन्न नगरों में उनके अनेक आध्यात्मिक प्रवचन, सत्संग, सांस्कृतिक एवं प्रेरणात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। इन आयोजनों के माध्यम से “पूज्य आचार्यश्री” सनातन धर्म के शाश्वत सिद्धान्तों, अद्वैत वेदान्त की दिव्य चेतना, भारतीय आध्यात्मिक परम्परा तथा मानवता के सार्वभौमिक कल्याण के सन्देश का व्यापक प्रसार करेंगे तथा विश्व समुदाय को शान्ति, सद्भाव, नैतिकता और आध्यात्मिक जागरण की दिशा में प्रेरित करेंगे।
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