सुनलो ले मेलोडी और झालमुढ़ी वालों
हम उन लोगों में से नहीं हैं जो सुबह किसी की चौखट पर सलाम ठोककर अपनी पहचान तलाशते फिरें। हम उन तीन वंशों में से एक चंद्रवंश के वंशज हैं, जिनके लिए स्वाभिमान सांस की तरह होता है। इसलिए न हम 13 में गिने जाते हैं, न 36 में। हमारी पहचान हमारे पूर्वजों की विरासत, हमारे संस्कार और हमारे शब्द की कीमत से होती है।
आजकल बड़ा अजीब दौर है। कुछ लोग दो पैसे क्या कमा लेते हैं, उन्हें लगता है कि पूरी दुनिया की इज्जत खरीद सकते हैं। किसी के कपड़े देखकर औकात तय करते हैं, किसी की गाड़ी देखकर सम्मान बांटते हैं और किसी की जेब देखकर रिश्ता निभाते हैं। ऐसे लोगों को शायद यह नहीं मालूम कि इतिहास में सबसे बड़ी लड़ाइयां खजाने बचाने के लिए नहीं, सम्मान बचाने के लिए लड़ी गई थीं।
हमारी परवरिश में यह नहीं सिखाया गया कि अमीर आदमी के आगे बिछ जाओ और गरीब आदमी को देखकर मुंह फेर लो। हमें सिखाया गया कि इंसान की पहचान उसके कर्म से होती है, उसके चरित्र से होती है। जिसने अपने शब्द की कीमत रखी, जिसने अपने रिश्तों का मान रखा, जिसने अन्याय के सामने खड़े होने का साहस रखा, वही असली आदमी कहलाने के योग्य है।
कुछ लोग नोटों की गड्डियां मेज पर रखकर खुद को बड़ा समझ लेते हैं। उन्हें लगता है कि पैसा ही ताकत है। लेकिन सच यह है कि पैसा सिर्फ सुविधा खरीद सकता है, सम्मान नहीं। डर पैदा कर सकता है, आदर नहीं। चाटुकार खरीद सकता है, सच्चे साथी नहीं। इसलिए जो लोग धन के घमंड में दूसरों को छोटा समझते हैं, वे अक्सर अपने ही अहंकार के बोझ तले दब जाते हैं।
हम चंद्रवंशी ठाकुर हैं। हमारे लिए सिर झुकाने की भी मर्यादा है। मां-बाप के चरणों में झुकेंगे, गुरु के सम्मान में झुकेंगे, राष्ट्रध्वज के सामने झुकेंगे, ईश्वर के सामने झुकेंगे और अपने से बड़े का आदर करेंगे। लेकिन किसी के धन, पद या रुतबे के सामने अपनी गैरत गिरवी रख दें, यह हमारे खून में नहीं है।
हमारी रगों में वह इतिहास बहता है जिसने सत्ता से ज्यादा सम्मान को महत्व दिया। जिसने हार स्वीकार कर ली, लेकिन आत्मसम्मान का सौदा नहीं किया। जिसने कठिनाइयां झेली, लेकिन किसी की गुलामी स्वीकार नहीं की। इसलिए जब कोई व्यक्ति अपनी दौलत का प्रदर्शन करके हमें प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो हमें उस पर हंसी से ज्यादा तरस आता है।
याद रखिए, महलों में रहने वाला हर व्यक्ति बड़ा नहीं होता और झोपड़ी में रहने वाला हर व्यक्ति छोटा नहीं होता। आदमी का कद उसकी कुर्सी से नहीं, उसके चरित्र से नापा जाता है। और चरित्र वह दौलत है जिसे न कोई लूट सकता है, न कोई खरीद सकता है।
इसलिए हम वही रहेंगे जो हमारे पूर्वजों ने हमें बनाया है स्पष्ट, स्वाभिमानी और बेखौफ। न किसी की चमचागिरी करेंगे, न किसी के आतंक में जिएंगे। सम्मान देंगे तो दिल से देंगे, और यदि कोई हमारे आत्मसम्मान को चुनौती देगा तो जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा जिसे वह समझता हो।
चंद्रवंशी ठाकुर हैं साहब। सिंगल हड्डी के सही, लेकिन रीढ़ सीधी लेकर पैदा हुए हैं। बिकना नहीं सीखा, झुकना नहीं सीखा, और जो अपने स्वाभिमान पर पहरा देना जानता हो, उसे दुनिया की कोई ताकत छोटा नहीं कर सकती। राजेंद्र सिंहजादौन


