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    सिर्फ़ युद्ध नहीं दिल जीते हैं आईपीएस आदित्य मिश्रा सर ने…

    सिर्फ़ युद्ध नहीं दिल जीते हैं आईपीएस आदित्य मिश्रा सर ने…35 साल पुरानी समस्या जिसमें 38 पुलिस वालों को मारा गया जबकि सामने वाले दुश्मन गिनती के या कम संख्या में मारे गए थे। जिससे भी सवाल करो कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश हो जाएगा क्या? तो जवाब असंभव होता था और मैं भी यही कहता था लेकिन 11 जून को बालाघाट में एक जवान आईपीएस अधिकारी की एंट्री हुई जिनके आते ही चार बंदूक धारी माओवादी एनकाउंटर में मार गिराये गए और दहशत के कारण 31 मार्च की जगह 11 दिसंबर को 4 माह पहले ही मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त हो गया।

    ये हो गई वर्दी की सख्ती वाली ड्यूटी लेकिन इसके अतिरिक्त आईपीएस आदित्य मिश्रा सर ने जंगल में बसे आदिवासी गांवों के लिए एकल सुविधा केंद्र खोले जहाँ एम्बुलेंस से गांव में ही इलाज, जिनकी आँखों को रोशनी चली गई उनका ऑपरेशन कराया, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र बनवाये, जमीन के पट्टे दिलवाए और अगर किसी आदिवासी भाई का मोबाइल चोरी हुआ तो उसे ढूंढ़वाया जबकि उन्हें थाने या तहसील जाने की जरूरत नहीं पड़ी।

    सर का कर्मचारियों से हंसमुख व्यवहार कि मैंने पहली बार किसी आईपीएस अधिकारी को केक लगाया होगा😀 लेकिन सर बुरा नहीं माने।

    अभी पूरे मध्यप्रदेश में बेरोजगार युवा भटक रहे थे क्योंकि एमपी पुलिस में बैंड भर्ती का फॉर्म भरा था लेकिन सिखाने वाले नहीं थे सर ने फ्री में ऑफर दिया तो यूपी बिहार राजस्थान सभी जगह से लड़के सीखने आ रहे हैं।

    एक अच्छे अधिकारी, बेहतरीन इंसान की तारीफ़ में दो शब्द जरूर लिखें। एक वर्ष का सफल ऐतिहासिक कार्यकाल पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई। #जयहिंद #आईपीएस #ipsadityamishra. santosh Patel dawara

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