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    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्ध होना क्या षड्यंत्र है ??

    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन

    रद्ध होना क्या षड्यंत्र है ??

     

    (अभी अभी निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा के तीनो प्रत्याशियों को निर्वाचित घोषित कर दिया ।

    प्रमाण पत्र जारी )

     

    मध्य प्रदेश में राज्य सभा चुनाव में तीसरी सीट के लिए जो मतो के संख्या के आधार पर कांग्रेस को ही प्राप्त होना था,नामांकन में त्रुटि के फलस्वरूप निरस्त होने के फ़लस्वरूप भाजपा को प्राप्त हो गया।

    मेरा यह निश्चित आकलन है कि यह त्रुटि अनजाने में नहीं अपितु जानबूझकर कर की गई है,और जानबूझकर कर किसी को बदनाम करने अथवा नीचा दिखाने का कृत्य ही षड्यंत्र की रचना करता है।

    मध्य प्रदेश से इस द्विवार्षिक चुनाव में सदस्यों की संख्या के आधार पर रिक्त ३(तीन)स्थान में से एक स्थान पर विजय प्राप्त करने हेतु आवश्यक मत

    (Quota)भी थे।लेकिन कांग्रेस अर्थात् कांग्रेस का

    प्रदेश और देश का नेतृत्व आपसी मतभेद और नेताओं की महत्वाकांक्षाओं के चलते ,चुनाव लड़ने के लिए कभी गंभीर नहीं दिखा।

    मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी कांग्रेस ने नहीं अपितु राहुल गांधी ने,बनाया था इन दिनों राहुल ही कांग्रेस है।अन्य किन नामो पर गंभीरता से विचार विमर्श हुआ?

    कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं और उनके प्रति निष्ठावान कार्यकर्ताओं का एक समूह राहुल गांधी को पसंद नहीं करता है,यह सर्व विदित है ,उनमें से कुछ तो मुखर हैं जो समय समय पर अपनी भावनायें प्रगट करते रहते हैं और कुछ दबे स्वर में।

    लेकिन

    मीनाक्षी , राहुल की प्रत्याशी है कांग्रेस की नहीं यह भावना कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उनके बीच वार्तालाप से बाहर आने लगी थी ।

    राज्य सभा में जाने की इच्छा रखने वालो की एक सूची समाचार पत्रों में तैर भी रही थी,लेकिन फ़रमान आया,

    मीनाक्षी का।

    उसी दिन चुनावी रणनीति की रचना में माहिर अनुभवी भाजपा के पदाधिकारियों ने तीसरे प्रत्याशी की जीत का आकलन आरम्भ कर दिया।कांग्रेस के अंदरखाने से भी जब संकेत मिलने प्रारंभ हो गए तब प्रदेश के वरिष्ठ सदस्यों /पदाधिकारियों ने केंद्रीय नेतृत्व को जो पूर्व। से प्रदेश में कांग्रेस के भीतर खाने की को सम्पूर्ण स्थिति से अवगत कराया और तीसरी सीट जिसके लिए केवल ८ अतिरिक्त वोट की आवश्यकता हैं ,पर भी जीत की संभावना पर विचार विमर्श प्रारंभ हुआ।एकाधिक कार्यकर्ताओं के नामो पर विचार कर महेश केवट को प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया।

    यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि यह चुनाव दलीय आधार पर नहीं होता है।

    नामांकन के अंतिम दिन महेश केवट और मीनाक्षी नटराजन ने अपने अपने एडवोकेट के सहयोग से फॉर्म

    दाखिल किए।

    महेश केवट का अंतिम दिन फॉर्म दाखिल करना समझ में आता है लेकिन मीनाक्षी का नामांकन करने के लिए अंतिम दिन ??

    किस योजना के तहत ?क्या सोच कर?? चुना गया।

    जहाँ तक मुझे जानकारी है,वरिष्ठ एडवोकेट जो पिछले ३५/४० वर्षों से कांग्रेस दल का विधिक कार्य देखते है और चुनाव की प्रक्रिया का उन्हें गहन अध्यन भी है।

    उनसे ऐसी त्रुटि हो जाए कि फॉर्म ही निरस्त हो जाए क्या ऐसा संभव है??

    या मीनाक्षी ने ही समस्त जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई??

    या राज्यसभा जाने के इच्छुक प्रभावशाली नेताओं जो राहुल गांधी से भी असंतुष्ट हैं ?ने षड्यंत्र रच कर इस स्थिति को निर्मित किया???

    ७५ वर्ष पुरानी पार्टी राज्यसभा के प्रत्याशी का फॉर्म भी त्रुटि रहित रूप में समय पर भर कर नहीं जमा कर सके ,ईससे ज़्यादा हास्यास्पद या शर्मनाक स्थिति क्या हो सकती है??

    इस सम्पूर्ण स्थिति से स्थिति से कांग्रेस के विधायकों और कार्यकर्ताओं में पहले से व्याप्त निराशा की भावना और प्रबल हो गई है ।

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