तीन-चार दिन पहले मैंने एक पोस्ट डाली थी जिसमें ममता बनर्जी की पार्टी के लिये काम करने वाली कंपनी आईपेक का जिक्र भी किया था। सुना है यह कंपनी भाजपा के लिये भी काम कर चुकी है तथा प्रशांत किशोर जैसे लोग इसके लिये काम कर चुके हैं। जाहिर है मोदी सरकार भी इसके काम के बारे में अच्छी तरह से जानती है कि यह टी.एम.सी. के लिये चुनाव प्रबंधन का काम देख रही है? नेशनल हेराल्ड मामले में स्पष्ट था कि जबतक कोई जांच एजेंसी एफ.आई.आर. न करे ई.डी. का प्रवेश नहीं करवाया जा सकता था? इसलिये कोयला घोटाले के बहाने ई.डी. को रास्ता दे दिया गया? ममता का चुनावी हवन तहस नहस करने या हो जाने के बाद आज इस कंपनी के डायरेक्टर विनेश चंदेल को मनी लाण्डरिंग के मामले में जमानत मिल गई। कमाल की बात तो यह है कि ई.डी. ने जमानत का विरोध तक नहीं किया? मध्यप्रदेश में इससे ज्यादा बहुत कुछ चल रहा है लेकिन सी.बी.आई. व ई.डी. को यहां का पता शायद नहीं मिल रहा है। विपक्ष अभी निद्रा में है या…? अब आप ही समझें।


