स्वच्छता रैंकिंग के लिए कर डाला ‘गोलमाल’
हमारे एमपी को यूं ही अजब-गजब नहीं कहा जाता। टीकमगढ़ में नगर पालिका ने स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंक हासिल करने के लिए ऐसा ‘गोलमाल’ कर डाला कि मामला कैमरे में कैद होते ही चर्चा का विषय बन गया। वीडियो सामने आने के बाद नगर पालिका की जमकर किरकिरी हो रही है।
हुआ यूं कि नगर पालिका की टीम एक मोहल्ले में पहुंची। वहां एक खुली नाली को लोहे की जालियों से ढंक दिया गया। इसके बाद एक कर्मचारी वहां झाड़ू लगाता नजर आया। टीम ने इस पूरी व्यवस्था के फोटो और वीडियो बनाए, लेकिन शूटिंग खत्म होते ही जालियां एक-एक कर वापस हटा ली गईं।
मामला तब सुर्खियों में आया, जब एक कांग्रेस पार्षद ने इन कथित दिखावटी व्यवस्थाओं को अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया।
पूरे घटनाक्रम के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन दिखाने के लिए केवल तस्वीरें चमकाने की कोशिश की गई, जबकि जमीनी सुधार पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। सफाई से ज्यादा फोटो की तैयारी हुई।
ये तो कुछ ऐसा ही मामला हो गया कि ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।’

पानी डालते ही सौंदर्यीकरण का ‘रंग’ उतर गया
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर शहर को संवारने का काम जोर-शोर से चल रहा है। लेकिन इस सौंदर्यीकरण अभियान के बीच गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़कों के डिवाइडरों पर की गई रंगाई-पुताई का रंग पानी पड़ते ही उतरता नजर आया।
दरअसल, भाजपा पार्षद और एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने निरीक्षण के दौरान इस काम में बरती जा रही लापरवाही को उजागर किया। जांच के दौरान पाया गया कि रंगाई-पुताई में इस्तेमाल किया गया रंग पानी डालने और हल्का रगड़ने पर ही उखड़ने लगा।
मामला सामने आने के बाद पार्षद ने मौके पर अधिकारियों और ठेकेदार को बुलाकर नाराजगी जताई और काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी सौंदर्यीकरण के नाम पर किए जा रहे कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी का आरोप लगाया।
अब इस मामले को शहर के सौंदर्यीकरण की रस्म अदायगी, लापरवाही या फिर भ्रष्टाचार कह सकते हैं। जिसने स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों के बीच किए जा रहे कामों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ऑफिस का एसी घर ले गईं नगर पालिका अध्यक्ष
भिंड के गोहद में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मंजू जगदीश माहौर ने हैरान करने वाला कारनामा कर दिया। आरोप है कि उन्होंने नगर पालिका परिषद का एसी अपने घर पर लगवा लिया।
मामला तब सामने आया, जब नगर पालिका के सीएमओ महेश जाटव ने उन्हें एसी वापस करने के लिए नोटिस जारी कर दिया। नोटिस में एसी नहीं लौटाने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
उधर, इस कार्रवाई से अध्यक्ष नाराज हो गईं और उन्होंने सीएमओ को खरी-खोटी सुना दी। नोटिस जारी करने वाले सीएमओ को ही बाद में हटा दिया गया।
खरी बात यह है कि एसी आमतौर पर ठंडक देता है, लेकिन गोहद में एसी को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि पूरा मामला ही गरमा गया।

मंत्री के बंगले में निकला ‘खाते-पीते घर का सांप’
छतरपुर में मंत्री दिलीप अहिरवार के बंगले में करीब 7 फीट लंबा सांप निकलने से कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया। बंगले में सांप दिखाई देने की सूचना मिलते ही सर्पमित्र को बुलाया गया।
मौके पर पहुंचे सर्पमित्र ने सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सांप को सुरक्षित पकड़ लिया। इस दौरान वहां लोगों की भीड़ जुट गई और पूरा घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि, सांप के रेस्क्यू से ज्यादा चर्चा सर्पमित्र की एक टिप्पणी की हो रही है। सांप को पकड़ने के बाद सर्पमित्र ने मजाकिया अंदाज में कहा- यह तो मंत्री जी के खाते-पीते घर का सांप है।
सर्पमित्र की यह टिप्पणी सुनकर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा पड़े। अब शहर में इसी ‘खाते-पीते घर के सांप’ की चर्चा हो रही है।

रिश्वत लेने का आरोप, फिर भी मिल गए वित्तीय अधिकार
भोपाल से सटे एक जिले में स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक अधिकारी कथित रूप से रिश्वत लेते पकड़ी गई थीं। हालांकि, इस मामले में उन्हें कोर्ट से थोड़ी राहत मिल गई। जिसके बाद मैडम को वित्तीय अधिकार भी सौंप दिए गए हैं। जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब लोगों का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन ऐसे मामलों के सामने आने के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह कैसा जीरो टॉलरेंस है।
इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल) शैलेंद्र द्विवेदी (टीकमगढ़), अमित सालगट (इंदौर), राजेश चौरसिया (छतरपुर), पवन दीक्षित (भिंड)।


