
नरोत्तम मिश्रा का नाम ही नरोत्तम नहीं है वे सही में नरो में उत्तम हैं। नरो में उत्तम मिश्रा ने ऐसा काम कर दिया है जो आजतक भाजपा में कोई नहीं कर सका। टिकट ना मिलने पर विद्रोह कर दिया और ऐसा वैसा विद्रोह नहीं कि प्रेस कांफ्रेंस कर दी या पार्टी के खिलाफ कोई न्यूज़ छपवा दी बल्कि असली वाला विद्रोह कर दिया।
नरो में उत्तम मिश्रा के समर्थकों ने हाईवे जाम कर दिया, तोड़फोड़ आगजनी की, पार्टी के विरोध में नारेबाजी की। भाजपा में पहले कभी ऐसा ना देखा ना सुना ।
भाजपा की तो परिपाटी रही है ये बोलने की, कि पार्टी मेरी माँ है। हमारे लिए नेशन फर्स्ट है। पार्टी जो भी दायित्व देगी उसे सहर्ष स्वीकार लेंगे बगैरह बगैरह चाहे अंदर बवासीर के भगन्दर बनने पर मवाद वाले रक्त स्नाव से ज्यादा तकलीफ हो रही हो।
भाजपा तो वो पार्टी है जो उपराष्ट्रपति का भी इस्तीफ़ा करवा लेती और बेचारा कहता है स्वास्थ कारणों से इस्तीफ़ा दिया जबकि उसी सुबह उसने मूली के 6 परांठे 250 ग्राम नोनी घी के साथ खाये थे और ऊपर से डेढ़ लीटर भैंस का दूध पिया था लेकिन मीडिया में बोला स्वास्थ ठीक नहीं है।
ऐसी भाजपा में नरो में उत्तम मिश्रा ने दिखा दिया कि वो साधारण नर नहीं हैं वो बात अलग है कि गली गलोच वो सड़कछाप नरो जैसी करते हैं।
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