
*भारतीय मजदूर संघ भेल भोपाल के कार्यालय प्रांगण में एक दिवसीय आध्यात्मिक और स्वास्थ्य शिविर का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न*
*रामचरितमानस में भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के दौरान कंद, मूल और फल खाने का विस्तृत विवरण मिलता है।*
*सुखवाड़ा द्वारा प्रायोजित आयोजन में मृत्युंजय योग केन्द्र, चिंतन मंडल, भेल में सेवारत सदस्य, भोजवंशी समूह और बाहर से पधारे 250 से ज्यादा सदस्यों द्वारा की गई सहभागिता*
भोपाल। मेरठ से पधारे डा गोपाल शास्त्री जी द्वारा आयोजन के मुख्य वक्ता के रूप में रामचरित मानस पर केन्द्रित आध्यात्मिक और स्वास्थ्य शिविर में अपने उद्बोधन द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
रामचरितमानस में भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के दौरान कंद, मूल और फल खाने का विस्तृत विवरण मिलता है। ऋषि-मुनियों और भीलों द्वारा दिए गए इन वन उत्पादों को राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा अपने मुख्य आहार के रूप में ग्रहण किया गया।
‘कंद’ जमीन के नीचे उगने वाले कंदमूल (जैसे शकर कंद) होते हैं, ‘मूल’ यानी जड़ें(गाजर,मूली,मूसली)और ‘फल’ (जैसे आम, जामुन,केले,सीताफल,रामफल, मोसम्बी, संतरें, आदि) जंगलों में मिलने वाले प्राकृतिक फल होते हैं।
श्रीरामचरितमानस के अरण्यकांड में शबरी द्वारा भगवान राम को प्रेमपूर्वक बेर खिलाने का प्रसंग बहुत प्रसिद्ध है। तुलसीदास जी लिखते हैं:
कंद मूल फल सुरस अति दिए राम कहुँ आनि।
प्रेम सहित प्रभु खाए बारंबार बखानि॥
अयोध्याकांड में भी इसका उल्लेख है कि वनवास जाते समय प्रभु राम द्वारा केवल सात्विक और प्राकृतिक आहार को ही अपना आधार बनाया गया था। इसे अमृत के समान पवित्र और पौष्टिक माना गया है।
“कंद मूल फल सुरस अति दिए राम कहुँ आनि। प्रेम सहित प्रभु खाए बारंबार बखानि॥
भावार्थ:- उन्होंने अत्यंत रसीले और स्वादिष्ट कन्द, मूल और फल लाकर श्री रामजी को दिए। प्रभु ने बार-बार प्रशंसा करके उन्हें प्रेम सहित खाया॥
कार्यक्रम का प्रारंभ राम दरबार के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर और पुष्प हार चढ़ाकर किया गया। श्री संजय चौधरी द्वारा डा गोपाल शास्त्री जी को शाल और श्रीफल देते हुए अतिथि सत्कार किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुखवाड़ा प्रतिनिधि द्वारा किया गया। इस अवसर पर वाग्देवी की प्रार्थना भी प्रस्तुत की गई। आयोजकों के सुंदर समन्वय से कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सभी आगंतुकों को सुबह जूस और दोपहर में फलाहार कराया गया।
*सुखवाड़ा सेवाश्रम, भोपाल*


