तालियां बजवाकर सीएम डॉ. मोहन यादव पर तंज मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को नया नाम दे दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘मोहन लाल अभिनंदन यादव’ कहा और उनके लिए मंच से तालियां भी बजवाईं। उनका अभिनंदन कराया।
जीतू पटवारी सतना में युवा संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मंच से पूछा- प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को कौन-कौन जानता है? जरा हाथ ऊंचा करो। इसके बाद उन्होंने कहा- मोहन लाल अभिनंदन यादव।
पटवारी ने तंज करते हुए कहा कि उनके लिए तालियां बजाओ, उनका अभिनंदन करो। क्योंकि वे मुझसे कहते हैं कि जीतू पटवारी के कहने पर कोई अभिनंदन नहीं करता। इसके बाद उन्होंने सीएम के लिए तालियां भी बजवाईं।
जब तालियां कम बजीं तो पटवारी ने कहा कि सीएम मोहन यादव का कोई अभिनंदन नहीं करना चाहता। ये संकेत समझो, ये परिस्थिति समझो। उनकी विदाई का समय आ गया है, उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
अब लोग जीतू पटवारी के इस वीडियो को लेकर चटकारे ले रहे हैं। कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश में चुनाव में अभी करीब ढाई साल बाकी हैं, लेकिन लगता है पटवारी साहब कुछ ज्यादा ही जल्दी में हैं।
लोग यह भी कह रहे हैं कि जिस युवा संवाद कार्यक्रम को जीतू पटवारी संबोधित कर रहे थे, उसमें युवा उंगलियों पर गिनने लायक थे। कार्यक्रम में कई कुर्सियां भी खाली नजर आईं। ऐसे में पटवारी इतना अतिआत्मविश्वास लाए कहां से?

सज्जन वर्मा ने रामायण और महाभारत मिक्स कर दी कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा की जुबान ऐसी फिसली कि उन्होंने रामायण और महाभारत ही मिक्स कर दी। भाजपा नेताओं को कोसते-कोसते वे महाभारत में ही रावण राज और कुंभकर्ण ले आए। वे इंदौर में जल संकट को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन को संबोधित कर रहे थे।
अपने भाषण के दौरान सज्जन वर्मा ने कहा- हमने महाभारत पढ़ी है। रावण के राज में एक ही कुंभकर्ण था। बस यहीं सज्जन वर्मा मिस्टेक कर गए। क्योंकि रावण और कुंभकर्ण का संबंध रामायण से है, महाभारत से नहीं।
सज्जन वर्मा का निशाना भाजपा और उसके नेता थे। उन्होंने तंज कसा कि नरेंद्र मोदी के राज में इंदौर में 13 कुंभकर्ण हैं। 9 विधायक, एक महापौर, एक सांसद, नगरीय प्रशासन मंत्री और सीएम मोहन यादव जो इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं।
पूर्व मंत्री का आरोप था कि इतने जनप्रतिनिधि होने के बावजूद इंदौर में जल संकट की समस्या बनी हुई है और जनता परेशान है। लेकिन इन नेताओं की नींद नहीं टूट रही है।
अब सज्जन वर्मा की इस गलती को महज स्लिप ऑफ टंग माना जाए या फिर कुछ और.. अब जब बात निकल ही गई है तो फिर दूर तलक जाएगी ही।

चलते कार्यक्रम में नाराज होकर चली गईं नपा अध्यक्ष नेताओं को क्या चाहिए। मंच, माला, माइक और मान-सम्मान। लेकिन जब इनमें से किसी चीज की कमी रह जाए, तो नाराजगी भी खुलकर सामने आ जाती है। ऐसा ही मामला शिवपुरी में देखने को मिला, जहां नगर पालिका अध्यक्ष और भाजपा नेता गायत्री शर्मा कार्यक्रम के दौरान नाराज होकर मंच छोड़कर चली गईं।
दरअसल, शिवपुरी में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में मंत्री समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। इसी दौरान नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा अचानक उठीं और मंच छोड़कर चली गईं। उनका यह अंदाज वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
बताया जा रहा है कि गायत्री शर्मा इस बात से नाराज थीं कि कार्यक्रम में उनके लिए मंच पर कुर्सी तक नहीं लगाई गई थी। इतना ही नहीं, स्वागत के दौरान उनका नाम भी नहीं पुकारा गया। इसी बात को लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की और कार्यक्रम बीच में छोड़ दिया।
दिलचस्प बात यह है कि जिस कार्यक्रम में यह पूरा घटनाक्रम हुआ, उसका आयोजन नगर पालिका की ओर से ही किया गया था। यानी जिस निकाय की वह मुखिया हैं, उसी के कार्यक्रम में उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ा।
अब लोग चुटकी ले रहे हैं। कह रहे हैं कि ये तो वही बात हो गई कि.. ‘हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था…

बीयर पीते दिखे भाजपा पार्षद, बोले- तब कांग्रेस में था जबलपुर में भाजपा पार्षद महेश सिंह राजपूत का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वे बीयर पीते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने भाजपा और उसके ‘संस्कार’ पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
मामला बढ़ता देख भाजपा पार्षद खुद सफाई देने सामने आए। उन्होंने दावा किया कि उनकी छवि को जानबूझकर खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने वीडियो को काफी पुराना बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने बीयर पी थी। तब वे कांग्रेस में थे।
महेश सिंह राजपूत ने कहा कि यह पुराना वीडियो है और राजनीतिक द्वेष के चलते अब उसे वायरल किया जा रहा है। उन्होंने बयान में यह भी कहा कि जब से मैं भारतीय जनता पार्टी में आया हूं, तब से मेरे द्वारा ऐसा कृत्य नहीं किया गया।
पार्षद के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने चुटकी लेना भी शुरू कर दिया। कई यूजर्स इसे ‘बीजेपी की वॉशिंग मशीन’ वाला मामला बताते हुए तंज कस रहे हैं।
खरी बात ये है कि राजनीति में पुराने वीडियो और पुराने बयान अक्सर नए विवाद खड़े कर देते हैं। क्योंकि सियासत में गड़े मुर्दे कब उखड़ जाएं, इसका अंदाजा किसी को नहीं होता।

इनपुट सहयोग – अमित सालगट (इंदौर), प्रशांत द्विवेदी (सतना), सुनील विश्वकर्मा (जबलपुर), कपिल मिश्रा (शिवपुरी)


