मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री भले ही न हुई हो, लेकिन प्री मानसून जमकर बरस रहा है। झाबुआ में शुक्रवार सुबह जोरदार बारिश हुई। धार, पीथमपुर और रतलाम में भी पानी गिरा। देवास में बारिश की वजह से एक कार रपटे में बह गई।
इससे पहले भोपाल में गुरुवार शाम करीब 70 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार के साथ आंधी चली और बारिश हुई। करीब 80 पेड़ या उनकी टहनियां सड़कों पर गिर गईं। इससे ट्रैफिक जाम के हालात बने। ओले भी गिरे।
मौसम केंद्र के मुताबिक, शुक्रवार को भोपाल-इंदौर समेत करीब 45 जिलों में मौसम बदला रहेगा। 60KM प्रतिघंटा तक की रफ्तार से आंधी चल सकती है। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोक नगर, सागर और दमोह में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट है।
वहीं, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, दतिया, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, पांढुर्णा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज आंधी तो कहीं बारिश वाला मौसम बना रहेगा।
भोपाल-इंदौर समेत 35 जिलों में तेज आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटे के दौरान 35 जिलों में तेज आंधी चलने का अलर्ट जारी किया है। इसके अनुसार, भोपाल, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़, देवास, रायसेन, सीहोर में 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चल सकती है।
इसके अलावा विदिशा, इंदौर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर में भी आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा।
तस्वीरों में देखिए, भोपाल का हाल




देवास में कार बही, बाल-बाल बचे चार लोग
देवास के सतवास में गुरुवार शाम तेज बारिश के दौरान बड़ा हादसा टल गया। मसुरिया-भंडारिया रोड पर रेतिया खाल रपटे पर पानी के तेज बहाव में एक कार बह गई। इसमें सवार चार लोगों ने कूदकर अपनी जान बचाई। बुरुट गांव के निवासी चारों लोग टिपरास में एक कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे।

रतलाम में सुबह से बारिश
रतलाम में शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 4 बजे अचानक बादल छा गए। फिर झमाझम बारिश होने लगी। आसमान में बादल छाए हैं। रुक-रुककर पानी गिर रहा है।

धार में तेज हवा के साथ बारिश
धार में बादल छाए हैं। गर्मी से राहत है। सरदारपुर तहसील के लाबरिया और बरमंडल में तेज हवा चली। फिर मूसलाधार बारिश होने लगी। बाग और आसपास के क्षेत्र में सुबह साढे़ 9 बजे से 20 मिनिट तक पानी गिरा।

इंदौर में 6.8 डिग्री लुढ़का पारा, कई शहरों में गिरावट
मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटे के अंदर 20 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी और बारिश का दौर रहा। रतलाम में सबसे ज्यादा डेढ़ इंच पानी गिर गया। भोपाल में पौन इंच और इंदौर-श्योपुर में आधा इंच से ज्यादा बारिश हुई। धार, गुना, नर्मदापुरम, शाजापुर, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, जबलपुर, छतरपुर, झाबुआ, सीहोर, मैहर समेत कई जिलों में भी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
आंधी-बारिश की वजह से रात के तापमान में खासी गिरावट आई है। भोपाल में पारा 20.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इंदौर में एक ही रात में 6.8 डिग्री की गिरावट के बाद तापमान 19 डिग्री पर आ गया। ग्वालियर में 27.5 डिग्री और जबलपुर में 26.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।
हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 18 डिग्री दर्ज किया गया। धार में 20.3 डिग्री, श्योपुर में 21 डिग्री, रतलाम में 21.2 डिग्री, दमोह में 22.5 डिग्री, शिवपुरी में 23 डिग्री, गुना में 23.5 डिग्री, खंडवा में 24 डिग्री, नर्मदापुरम में 24.1 डिग्री, नरसिंहपुर में 24.6 डिग्री और रायसेन में 24.8 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर रहा।
केरल पहुंचा मानसून, एमपी में 20 जून तक आने की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, इस साल मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 5 से 7 दिन लेट हो सकती है। प्रदेश में मानसून के एंटर होने की सामान्य तारीख 15 जून है। दक्षिणी हिस्से से मानसून एमपी में दस्तक देता है।
साल 2025 में 1 दिन बाद यानी 16 जून को मानसून एंटर हो गया था, जबकि विदाई 15 अक्टूबर तक हुई थी। सामान्यत: केरल में आने के 15 दिन बाद एमपी में भी मानसून दस्तक दे देता है। इस वजह से इस बार प्रदेश में मानसून आने की तारीख 20 से 22 जून बताई जा रही है। केरल में 4 जून को ही मानसून ने दस्तक दी है।

अब जानिए, मई में कैसी रही गर्मी?
मध्य प्रदेश में मई में भीषण गर्मी का रिकॉर्ड तो बना ही, बारिश भी ज्यादा हुई। मई की शुरुआत में आंधी-बारिश का दौर रहा। 15 मई से मौसम बदला, लेकिन 18 मई से प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ने लगी। इस दौरान खजुराहो में पारा रिकॉर्ड 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन समेत कई शहरों में पारे में जमकर बढ़ोतरी हुई। 25 मई से नौतपा लग गए, लेकिन एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब प्रदेश के किसी न किसी जिले में तेज आंधी और बारिश न हुई हो। सप्ताह के आखिरी दिनों में तो कई जिलों में ओले भी गिरे।
मौसम विभाग के मुताबिक, मई महीने में करीब सवा इंच पानी गिरा जबकि 18 मिमी यानी पौन इंच पानी गिरता है। इस तरह 56 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो गई। इस बार मानसूनी बारिश औसत 90 प्रतिशत तक ही होगी।

मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम




जून में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड
भोपाल में 15 जून तक तेज गर्मी
भोपाल में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ही ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर दिखा है। 3 साल तो तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। वहीं, रात का टेम्परेचर 17.4 डिग्री तक आ गया।
साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश हुई थी। वहीं, साल 2024 में पूरे महीने 10.9 इंच पानी गिरा था। 10 साल में दूसरी बार इतनी बारिश हुई थी। 24 घंटे में करीब 5 इंच पानी बरसा था।

इंदौर में पिछले साल हुई थी 4 इंच बारिश
जून में इंदौर में दिन के तापमान में खासी गिरावट होती है। पिछले 6 साल यानी 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 में जून में कम गर्मी पड़ी। पारा 39.6 से 41.6 डिग्री के बीच रहा। पिछले साल तापमान 41.6 डिग्री तक पहुंचा था। इस महीने कोटे की 20 प्रतिशत तक बारिश हो जाती है। पिछले साल साढ़े 5 इंच पानी गिरा था।
ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1980 में यहां जून महीने में 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 23 जून 2003 को बना था। 3 जून 1991 को इंदौर में दिन का पारा 45.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था।

ग्वालियर में 47 डिग्री पार हो चुका तापमान
ग्वालियर में मई के बाद जून में भी तेज गर्मी रहती है। 10 साल के आंकड़ों की बात करें तो साल 2019 में अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं, 2024 में पारा 45.7 डिग्री और 2025 में 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस महीने अमूमन तापमान 45 से 46 डिग्री ही रहता है।
मौसम विभाग के अनुसार, 11 जून 2019 को पारा 47.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं, 1952 में पूरे महीने साढ़े 28 इंच बारिश हो गई थी। एक दिन में सर्वाधिक साढ़े 7 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 जून 1952 को बना था। साल 2025 में यहां पूरे महीने 10 इंच से ज्यादा पानी गिरा था।

जबलपुर में 10 साल अच्छी बारिश
मानसून की एंट्री के साथ ही जबलपुर में अच्छी बारिश होती है। यहीं से मानसून की एंट्री होती है, इसलिए अन्य जिलों की तुलना में जबलपुर में अच्छा पानी गिरता है। साल 2016 से 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोटे की 30% तक बारिश जून में ही हुई। पिछले साल साढ़े 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इस बार भी जबलपुर संभाग के दक्षिणी हिस्से से ही मानसून एंटर हो सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, जबलपुर में 1998 में एक महीने में करीब 30 इंच बारिश दर्ज की गई थी। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 16 जून 1882 को 24 घंटे में साढ़े 7 इंच बारिश हुई थी।

उज्जैन में भी अच्छी बारिश का ट्रेंड
जून महीने में उज्जैन में भी अच्छी बारिश होने का ट्रेंड है। 2016 से 2025 के बीच उज्जैन में 2.5 से 8 इंच तक बारिश हो चुकी है।
उज्जैन में बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1970 में पूरे महीने साढ़े 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 15 जून 2001 को बना था। इस दिन करीब साढ़े 6 इंच बारिश हुई थी। साल 2025 में पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।



