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    वंदन, अभिनंदन के लिए याद रहेगी

    वंदन, अभिनंदन के लिए याद रहेगी 13 जुलाई 2026
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    ( अमिताभ पाण्डेय )
    इन दिनों हम ऐसे समयकाल से गुजर रहे हैं जिसमें सामाजिक व्यवहार, रीति रिवाज, परंपराओं, बोलचाल की भाषा, खान पान, परिधान तक हर तरफ बदलाव देखा जा रहा है।
    ऐसा बदलाव विवाह समारोह, विवाह की वर्षगांठ, जन्मदिवस के मौके पर भी देखा जा रहा है ।
    ऐसे शुभ अवसर पर होने वाले पारंपरिक आयोजन की जगह पश्चिमी सभ्यता, पश्चिमी परिधान , पश्चिमी खान पान की जीवनशैली ने ले ली है। ये जीवनशैली कुछ लोगों के लिए स्टेटस का सिंबल बन गई है।
    ऐसे लोग बढ़ रहे हैं जिनको पंचतारा होटलों में अपना जन्मदिन मनाने, हाईप्रोफाइल पार्टियों के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने का इंतजार रहता है। उच्च वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग से लेकर लोअर मिडिल क्लास तक के जेन जी तो जन्मदिन को लेकर ज्यादा ही उत्साहित हैं।
    इनका उत्साह शाम ढले से देर रात तक भोपाल शहर वी आई पी रोड , वोट क्लब , वन विहार, स्मार्ट सिटी की प्लेटिनम प्लाजा से जवाहर चौक जाने वाली अटल स्मार्ट रोड , लिंक रोड नंबर एक, दो, तीन , बावड़ियां कलां रोड, होशंगाबाद रोड, एयरपोर्ट रोड सहित भोपाल के अनेक चौक – चौराहों पर तेज रफ्तार संगीत के साथ फुल स्पीड वाहन चलाते हुए नजर आ जाता है। ऐसे युवा उत्साह से लबरेज़ होकर तेज रफ्तार वाहन चलाते हुए यह भूल जाते हैं कि हमें भविष्य में ऐसे जन्मदिन वर्षों तक मनाना है और दूसरों के जन्मदिन में भी उत्साहपूर्वक शामिल होना है।
    अपना जन्मदिन गरिमामय समारोह के रूप में कैसे मनाएं ?
    इसका आदर्श और अनुकरणीय उदाहरण हाल ही में देखने को मिला।
    यह जन्मदिन ऐसे व्यक्तित्व को समर्पित रहा जो सबके सुख , दुख , जन्मदिन समारोह में शामिल होते हैं लेकिन खुद का जन्मदिन मनाना पसंद नहीं करते। राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ वे देश , धर्म, समाज , पत्रकारिता के लिए जो कर सकते हैं , चुपचाप कर रहे हैं।
    हमेशा प्रचार, प्रसार से दूर और किसी काम को पूरे मनोयोग के साथ सफलतापूर्वक पूर्ण कर देने के बाद श्रेय लेने से बचने वाले ऐसे व्यक्तित्व का नाम चंद्रहास शुक्ल है।
    जिनका नाम धर्म, समाज , राजनीति, प्रशासन, साहित्य , पत्रकारिता, के गलियारों में बहुत आदर , सम्मान से लिया जाता है।
    हाल ही में चंद्रहास शुक्ल का 75 वा जन्मदिन उनके शुभचिंतकों ने उत्साहपूर्वक मनाया। यह जन्मदिन समारोह ऐसा मना जिसकी मिसाल आगे आने कई वर्षों तक दी जाती रहेगी।
    जन्मदिन समारोह अपने लेखन, सेवाभाव और सहयोग के लिए चर्चित कवि, पत्रकार और समाजसेवी चंद्रहास शुक्ल के 75 वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
    उनके शुभचिंतकों की आत्मीय सभा 13 जुलाई 2026 की शाम को मानस भवन के परिसर में यादगार बन गई।
    इस मौके पर आत्मीयता के भाव से लबरेज माहौल में श्री चंद्रहास शुक्ल के शुभचिंतक, परिवारजन , पत्रकार बंधु के साथ ही राजनीतिक – धार्मिक – सामाजिक – साहित्यिक क्षेत्र के क्षेत्र में सक्रिय वरिष्ठजन भी समारोह में आनंदित होकर मेल मुलाकात करते नजर आए। वंदन , अभिनंदन का यह समारोह यादगार बन गया।
    श्री शुक्ल के जन्मदिन पर भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित मानस भवन में जन्म दिवस समारोह का कार्यक्रम शुभारंभ प्रतिभाशाली गायिका शाश्वती और शांभवी के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति से हुआ ।
    लगभग 1 घंटे की सुमधुर भजनों की प्रस्तुति में उन्होंने सीता स्वयंवर , देवी आराधना , शिव भक्ति , रामायण के प्रसंग पर केंद्रित प्रेरणादायी भजन सुनाए।
    इसके उपरांत जन्म दिवस समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने श्री चंद्रहास जी के व्यक्तित्व को लेकर रोचक प्रसंग सुनाए। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने श्री चंद्रहास जी को 75 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपलक्ष में सम्मान पत्र भेंट किया। कार्यक्रम में स्वामी कृष्ण प्रेमानंद गिरी , वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा , पंकज कुलश्रेष्ठ , डाक्टर मधुसूदन देशपांडे , दिनेश शर्मा, सहित अन्य शुभचिंतकों ने अपने विचार रखे ।
    इस अवसर पर भोपाल सहित तीन जिलों से प्रकाशित होने वाले लोकप्रिय हिंदी दैनिक दीनबंधु के विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया। यह विशेषांक श्री चंद्रहास शुक्ला के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित है। इसका संपादन दैनिक दीनबंधु के प्रधान संपादक दिनेश शर्मा ने किया है। विशेषांक में
    वरिष्ठ संपादक, कवि , लेखक महेश श्रीवास्तव और कवि दिनेश प्रभात , लेखक पत्रकार संजय सक्सेना गोलू , संजीव शर्मा ने भी अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की ।
    कार्यक्रम में कील और धागे से कलाकार शुभम कुशवाहा द्वारा तैयार किया गया श्री चन्द्रहास शुक्ल का शानदार पोट्रेट आकर्षक का केन्द्र बना रहा ।
    इस अवसर पर मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विकास दवे , वरिष्ठ पत्रकार सुधीर सक्सेना, विनोद तिवारी, समाजसेवी गिरीश तिवारी, पूर्णिमा चतुर्वेदी , पी स्मिता राव , हिमांशी शर्मा , श्रीमती अर्चना -संदीप सोनी, यज्ञ आचार्य जयवीर शास्त्री, सुनील आर्य, वेदप्रकाश आर्य, श्रीमती सरोज सोनी आर्य ,
    प्रकाश चन्द्र सोनी, अतुल वर्मा, वंदना पांडे, मीना शुक्ला , दिव्या शुक्ला, गोपाल जी मेहता , महेश सक्सेना, अशोक मनवानी , सत्यनारायण शर्मा,अशेष श्रीवास्तव , विक्रम श्रीवास्तव, हरिमोहन मोदी, वीरेंद्र सिन्हा, राधेश्याम अग्रवाल, प्रेम नारायण प्रेमी , प्रेम पगारे , राजेश चतुर्वेदी, राघवेंद्र सिंह, अलीम बज्मी, आरिफ मिर्जा, सुनील गुप्ता , पुष्पेन्द्र मिश्रा, मनोज कुमार , शायर बद्र वास्ती , शुरैह नियाजी , अभिषेक खरे, राजेंद्र मेहता, लीलेन्द्र सिंह मारण, सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
    समारोह के दौरान श्री चन्द्रहास शुक्ल को उनके जन्मदिवस के अवसर पर शुभचिंतकों ने हार- फूल – माला – गुलदस्तों , शाल , श्रीफल , स्मृति चिन्ह, के साथ ही दो लाख एक हजार रुपए की राशि भेंट की । चूंकि उत्सवमूर्ति के स्वभाव को गहराई से जानने वाले उनकी आदत से वाकिफ हैं इसलिए नाराजगी या ऐतराज की कोई गुंजाइश नहीं रखी गई।
    जन्मदिवस के लिए सहमत करने से लेकर सम्मान निधि श्री शुक्ल के बैंक खाते में जमा करवाने तक का काम पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा के आग्रह ,स्वामी कृष्ण प्रेमानंद गिरी , डाक्टर मधुसूदन देशपांडे सहित सभी शुभचिंतकों के सहयोग से शानदार – यादगार बन गया। जन्मदिवस के बहाने आत्मीय संबोधन , भजन, वंदन, अभिनंदन जैसे विविध रंगों से सजी इस शाम का समारोहपूर्वक समापन भोजन के साथ हुआ जहां लोग एक दूसरे को सफल आयोजन की बधाई देते नजर आए ।
    आदर्श, आनंदमय और गरिमामय माहौल में मने इस जन्मदिन समारोह की यादें हमेशा साथ रहेंगी।
    ( लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं , संपर्क : 9424466269 )

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    ⚖️ सूचना आयोगों में द्वितीय अपील का निराकरण 45 दिन के भीतर करने के 3 हाई कोर्ट्स के आदेश ⚖️ 18-07-2026 आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 19(3) के तहत सूचना आयोग (केंद्रीय या राज्य) के पास दर्ज होने वाली द्वितीय अपील (Second Appeal) के निपटारे के लिए कानून में कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं लिखी गई है। हालांकि, आरटीआई कार्यकर्ताओं और सूचना चाहने वालों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts) ने ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। कोर्ट्स का स्पष्ट मानना है कि यदि द्वितीय अपील को अनिश्चितकाल के लिए लटकाया गया, तो आरटीआई कानून का मूल उद्देश्य (त्वरित सूचना) ही समाप्त हो जाएगा। * उन 3 हाई कोर्ट्स के फैसलों का विवरण,जिनमें सूचना आयोग को द्वितीय अपील का निपटारा 45 दिनों के भीतर (या अधिकतम 45 दिनों को उचित समय मानते हुए) करने का निर्देश दिया गया है ~ 1. कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) – * केस का नाम : “अखिल कुमार रॉय बनाम पश्चिम बंगाल सूचना आयोग और अन्य” (Akhil Kumar Roy v. The West Bengal Information Commission & Ors.) * रिट याचिका संख्या : W.P. No. 11933(W) of 2010 * फैसले की तारीख : 7 जुलाई 2010 * कोर्ट का निर्देश : इस मामले में याचिकाकर्ता की द्वितीय अपील आयोग के पास लंबे समय से लंबित थी। न्यायमूर्ति जयंत कुमार बिस्वास की एकल पीठ ने कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि आरटीआई अधिनियम की विभिन्न धाराओं में ‘तेजी (Speed)’ का जो ताना-बाना बुना गया है, वह द्वितीय अपील में आकर अचानक गायब सा हो जाता है। हाई कोर्ट ने माना कि भले ही अधिनियम में द्वितीय अपील के निराकरण के लिए अवधि तय नहीं है, लेकिन आयोग इसे असीमित समय तक लंबित नहीं रख सकता। कानून की मंशा को देखते हुए 45 दिनों की अवधि को ही द्वितीय अपील के निपटारे के लिए एक ‘तार्किक और उचित समय (Reasonable Period)’ माना जाना चाहिए। आयोग को इसी समय-सीमा में फैसला करना चाहिए। * इसी फैसले के आधार पर बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने ‘आलोक पटवारी बनाम राज्य मुख्य सूचना आयुक्त’ [2010] मामले में भी 45 दिनों के भीतर अपील तय करने का आदेश दोहराया। 2. कर्नाटक हाई कोर्ट (Karnataka High Court)- * केस का नाम : “जयप्रकाश रेड्डी बनाम केंद्रीय सूचना आयोग और अन्य” (Jayaprakash Reddy v. Central Information Commission & Anr.) * रिट याचिका संख्या : W.P. No. 47124/2015 * कोर्ट का निर्देश : इस मामले में याचिकाकर्ता की द्वितीय अपील एक साल से अधिक समय से केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के समक्ष लंबित थी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने माना कि आरटीआई अधिनियम की धारा 19(6) के तहत प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) के लिए 30 से 45 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करना अनिवार्य है। अदालत ने तार्किक सिद्धांत (Logical Consistency) अपनाते हुए व्यवस्था दी कि चूंकि प्रथम अपील के लिए एक समय-सीमा निर्धारित है, इसलिए यह निष्कर्ष निकालना पूरी तरह सुरक्षित और न्यायसंगत है कि द्वितीय अपील का निपटारा करने के लिए भी वही 45 दिनों की अवधि (या उससे कम) लागू मानी जाएगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो यह सूचना के अधिकार के मूल सिद्धांतों की विफलता होगी। 3. बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) – * केस का नाम : “शैलेश गांधी और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग” (Shailesh Gandhi v. Maharashtra State Information Commission) * जनहित याचिका संख्या : PIL No. 2325 of 2025 * फैसले की तारीख : 11 जून 2025 * कोर्ट का निर्देश : पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी और अन्य आरटीआई कार्यकर्ताओं ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मांग की थी कि महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग को द्वितीय अपीलों और शिकायतों का निपटारा 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही मूल अधिनियम में द्वितीय अपील के निपटारे के लिए कोई वैधानिक समय सीमा दर्ज नहीं है, फिर भी संवैधानिक और प्रशासनिक सिद्धांतों के अनुसार किसी भी प्राधिकारी को एक ‘उचित समय’ (Reasonable Time) के भीतर ही निर्णय लेना होता है। कोर्ट ने सूचना आयोग को कड़े निर्देश दिए कि वह आरटीआई आवेदनों की पेंडेंसी को समाप्त करने के लिए ठोस प्रयास करे और द्वितीय अपीलों व शिकायतों का निपटारा यथासंभव शीघ्र (As Expeditiously As Possible) यानी उसी 45 दिनों की तार्किक भावना के तहत करने का प्रयास (Endeavour) करे। > इन तीनों उच्च न्यायालयों के फैसलों का मुख्य निचोड़ यह है कि आरटीआई अधिनियम, 2005 की अपील संबंधी धारा 19(6) में जो 45 दिनों की अधिकतम सीमा प्रथम अपील के लिए तय की गई है, उसी समयावधि की कानूनी भावना और ‘उचित समय के सिद्धांत’ को आधार बना कर, सूचना आयोगों को भी अपनी कार्यप्रणाली तय करनी चाहिए, ताकि नागरिकों को समय पर न्याय मिल सके।

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