सुप्रीम कोर्ट पूछ चुका है मध्यप्रदेश में
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सरकार कहाँ है.?आइये,जवाब तलाशें
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दो तीन महीने पहले जब रेत माफिया द्वारा फारेस्ट गार्ड की कुचल कर हत्या कर दी गई तब सुप्रीमकोर्ट ने पूछा था मध्यप्रदेश में सरकार कहाँ है.? यहीं के बालाघाट में रेत माफिया ने पुलिस कांस्टेबल की हत्या की कोशिश की है.इसके बाद सुप्रीमकोर्ट ने मध्यप्रदेश के साथ राजस्थान सरकार को भी हड़काया-नाक के नीचे खनन हो रहा और अफसरों को दिखता नहीं.! फिर उसने पूछा की हमारी फटकार के बाद ही क्यों जागा सिस्टम.? जब मामा शिवराज का राज था तब सुप्रीमकोर्ट ने विधायक के हत्या आरोपी पति की गिरफ़्तारी में टालमटोल पर फटकार लगा यहाँ तक कह दिया था-मान लें आपकी सरकार संविधान के मुताबिक़ काम नहीं कर सकती है.!
जब हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को अवैध घोषित किया तब मामा मुख्यमंत्री गरजे थे की कोई माई लाल इसे खत्म नहीं कर सकेगा और जरूरत पड़ी तो सारे कानून बदला डालूँगा.यह बयान सुप्रीम कोर्ट में सरकार की याचिका के बाद दिया गया था.सारे समझ गए थे की माई लाल किसे कहा जा रहा है.इस फ़िल्मी डायलाग को दस साल हो गए और लाखों शासकीय सेवक मामा को कोसते,बद्दूआएँ देते रिटायर हो गये.इससे मध्यप्रदेश में जर्जर होते प्रशासनतंत्र पर दैनिक भास्कर के संपादक की ताजा बात बेबाक सब बयान कर रही है.सड़कों पर दुर्घटनाओं में गाजर मूली की तरह लोग मारे जा रहे हैं. इससे जुड़े परिवहन विभाग के हालत पर भी खबर छपी है.
अब मोहन राज पर आते हैं जिनकी हुकूमत से ही सुप्रीमकोर्ट ने सवाल किया है की सरकार कहाँ है.? दरअसल उनकी सरकार विज्ञापनों/भूमिपूजन/लोकार्पण/शिलान्यास/इन्वेस्टर्स समिट्स/सिंहस्थ/आध्यात्म/लोक-परलोक के निर्माण/भोपाल से बाहर केबिनेट की शाही बैठकों और कर्ज लेने के नए नए रिकार्ड बनाने में ही डूबी रहती है.भैया कुछ भी दावे करें पर हकीकत यह यह है की उनके राज में सिर्फ मीडिया की पाँचों अंगुलियाँ घी में और सिर कड़ाही में है.शायद ही कोई दिन जाता होगा जब मोदी मोहन की फोटो से लैस विशाल विज्ञापन दिखाई ना देता हो.!बस मौक़ा मिलना चाहिए और चूके मत चौहान की तर्ज पर सरकार का विज्ञापन हाजिर.
आज ही राष्ट्रपति के कार्यक्रम का पूरे पेज का विज्ञापन मौजूद है जिसे आधे से आधे पेज में समेटा जा सकता था.प्रधानमंत्री मोदी की सत्ता के 12 बरस की शुरुआत से दस दिन से अख़बारों के मत्थे के नीचे पहले पेज पर आठ कालम में महंगा विज्ञापन मौजूद रहता है.उधर जनता,खासतौर से गाँव की महिलाएँ और बेटियां पानी के लिए जान पर खेलती हैं जिनमे से कई मासूमों की मौत की खबर है.sreeprakash dixet


