40 बीघा, 33 बीघा और 12 बीघा… ये सिर्फ जमीन के आंकड़े नहीं हैं। यह मध्य प्रदेश के गुना जिले में फॉरेस्ट की जमीन पर कब्जा कर उसकी खरीद-फरोख्त के उस संगठित खेल की बानगी है, जो सालों से बेखौफ चल रहा है।
तरीका बेहद सीधा और शातिर है- पहले जंगल की जमीन पर कब्जा करो, पेड़ काटकर उसे खेती लायक बनाओ और फिर महज 1000 रुपए के फर्जी स्टांप एग्रीमेंट पर लाखों रुपए लेकर दूसरों को बेच दो। बमोरी इलाके में सामने आए ऐसे ही तीन मामलों में 85 बीघा से ज्यादा वन भूमि का सौदा 22 लाख रुपए से अधिक में कर दिया गया। अब वन विभाग ने इस रैकेट पर FIR दर्ज कराने की तैयारी शुरू की है।
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के मौके पर दैनिक भास्कर ने वन भूमि पर अतिक्रमण से लेकर उसकी खरीद-फरोख्त तक के पूरे नेटवर्क की पड़ताल की। पढ़िए रिपोर्ट….

3 बड़े केस: जहां धड़ल्ले से बेची गई सरकारी जमीन



केस-1: झुमका बीट- 33 बीघा वन भूमि का 10.85 लाख में एग्रीमेंट
जगदीश भिलाला ने 33 बीघा फॉरेस्ट लैंड पर कब्जा कर जंगल साफ किया। इसके बाद 5 फरवरी 2023 को यह जमीन प्रेमनारायण बंजारा को 10.85 लाख रुपए में एग्रीमेंट के जरिए बेच दी।
केस-2: रामपुर बीट- 12 बीघा जमीन का 4 लाख में सौदा
नौनेरा गांव के परसादी सहरिया ने 12 बीघा वन भूमि पर कब्जा किया और 17 जनवरी 2023 को इसे दौलत बंजारा को 4 लाख रुपए में थमा दिया।
केस-3: कॉलोनी बीट- 40 बीघा जमीन 7.35 लाख में बेची
धनोरिया गांव के जगमोहन किरार ने 40 बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा जमाया और 27 मई 2025 को सुनील मीणा को 7.35 लाख रुपए में बेच दी।

इस तरह काम करता है पूरा नेक्सस?
- आदिवासियों को आगे करना: बमोरी क्षेत्र में करीब 75 हजार आदिवासी आबादी है। इलाके के दबंग पहले आदिवासियों को खर्चा-पानी देकर जंगल काटने के लिए आगे करते हैं।
- जमीन को खेती लायक बनाना: पेड़ काटने के बाद जमीन पर लाखों रुपए खर्च कर उसे ट्रैक्टर चलाने योग्य बनाया जाता है। (जैसे झुमका बीट में लालाराम बंजारा ने 13 बीघा वन भूमि को 13 लाख खर्च कर खेती लायक दावा किया और 7 लाख में बेच दिया)।
- दबंगों का कब्जा: जमीन तैयार होते ही दबंग आदिवासियों को थोड़ी रकम देकर या डरा-धमकाकर जमीन अपने कब्जे में ले लेते हैं।
- 1,000 के स्टांप पर गैरकानूनी सौदा: नाम नहीं छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि यह खेल 20,000 से लेकर 50,000 प्रति बीघा के रेट पर चल रहा है। नोटरी और एग्रीमेंट के भरोसे जमीनों की शिफ्टिंग होती है, जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है।

10 साल में एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर कब्जा
वन विभाग और हाईकोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक, गुना में 10 साल में 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जंगल साफ हो चुका है। सबसे ज्यादा अतिक्रमण बमोरी और दूसरे नंबर पर चांचौड़ा क्षेत्र में हुआ है।


बाहर से लाकर आदिवासी परिवार को बसाया, फिर भगाया
भास्कर की पड़ताल में जंगल की जमीन को हथियाने के तरीके का एक उदाहरण सारेठा गांव में मिला। 1960 के दशक में पटेलिया समुदाय के लोग पलायन कर यहां पहुंचे। वे इस इलाके के दबंगों के यहां मजदूरी करने लगे।
जब वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ तो दबंगों ने इन आदिवासियों के नाम पर पट्टा करा लिए। बाद में उन्होंने ऐसे तमाम मजदूरों को भगा दिया, इनमें से कई लोग अब भी डुमावन, सारसलैया जैसे इलाकों में रह रहे हैं।

जमीन के लिए तीर-कमान चले, घर फूंके गए और हत्याएं हुईं
केस-1: 6 बीघा जमीन के विवाद में किसान की थार से कुचलकर हत्या
महीना- सितंबर 2025 जगह: गणेशपुरा, फतेहगढ़
राजस्थान की छह बीघा जमीन के विवाद में किसान रामस्वरूप नागर और उनके परिवार पर 10-15 लोगों ने हमला कर दिया। मारपीट के दौरान रामस्वरूप के ऊपर थार चढ़ा दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई। मामले में भाजपा नेता और पूर्व सरपंच महेंद्र नागर को मुख्य आरोपी बनाया गया। पुलिस ने 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। भाजपा ने आरोपी नेता को निष्कासित कर दिया।

केस-2: फॉरेस्ट की जमीन के विवाद में तीर लगने से मौत
महीना- सितंबर 2025 जगह- चाकरी-छिकारी गांव, बमोरी
फॉरेस्ट की जमीन पर कब्जे को लेकर भील-भिलाला समुदाय के बीच विवाद चल रहा था। पंचायत में समझौता नहीं पर दोनों पक्षों के 300-400 लोग आमने-सामने आ गए। तीर और पत्थर चले। गंगाराम भील (55) के सीने में तीर लगा और उनकी मौत हो गई। हालात इतने तनावपूर्ण थे कि प्रशासन को गांव से 4 किमी दूर डेरा डालना पड़ा। 16 घंटे बाद शव गांव से बाहर निकाला जा सका। मामले में 16 नामजद व अज्ञात आरोपियों पर केस दर्ज किया गया।

केस-3: जमीन विवाद के बाद 10 घर जले, एक की मौत
महीना- नवंबर 2023 जगह- पेन्हेटी गांव, फतेहगढ़
फॉरेस्ट की जमीन को लेकर भील और बंजारा समुदाय के बीच विवाद हुआ। मारपीट में घायल भील समाज के गल सिंह भिलाला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद भड़की हिंसा में बंजारा समाज की बस्ती के 8-10 घर और दो ट्रैक्टर जला दिए गए। घरों में रखा अनाज भी आग की भेंट चढ़ गया। पुलिस पर पथराव हुआ और गांव में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

केस-4: सरकारी जमीन विवाद में पुलिस पर पथराव
महीना- जुलाई 2023 जगह- विष्णुपुरा, फतेहगढ़
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ। महिला से मारपीट के बाद मामला तूल पकड़ गया। अवैध निर्माण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम के सामने हजारों लोग जमा हो गए। पुलिस और प्रशासन पर पथराव हुआ, 50 से ज्यादा वाहन क्षतिग्रस्त हुए। हालात नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

केस-5: जमीन का कब्जा मिलने के 6 दिन बाद महिला को जिंदा जलाया
महीना- जुलाई 2022 जगह- धनोरिया, गुना
करीब 20 साल की कानूनी लड़ाई के बाद रामप्यारी सहरिया को तीन एकड़ जमीन का अधिकार मिला था। आरोप है कि कब्जाधारियों ने जमीन खाली करने के विवाद में उनके साथ मारपीट की और आग लगा दी। भोपाल में इलाज के दौरान छह दिन बाद उनकी मौत हो गई। मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। घटना के बाद पीड़ित परिवार गांव छोड़कर चला गया।

आरोपी गिरफ्तार हुए, पर लगता नहीं, अब वो लोग वापस गांव आएंगे
70 वर्षीय जमनालाल बताते हैं कि जून 2022 में प्रशासन ने धनोरिया गांव में भतीजे अर्जुन और उसकी पत्नी रामप्यारी की जमीन की सीमांकन कार्रवाई की थी। करीब 20 साल के संघर्ष के बाद सहरिया परिवार को 3 एकड़ जमीन का अधिकार मिला, लेकिन उस पर पहले से कब्जा था।
2 जुलाई 2022 को रामप्यारी जमीन देखने पहुंची तो वहां कुछ लोग ट्रैक्टर चला रहे थे। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसी रामप्यारी को गुना से भोपाल रेफर किया गया, जहां छह दिन बाद उसकी मौत हो गई।
जमनालाल का कहना है कि घटना के बाद रामप्यारी का परिवार डर के कारण गांव छोड़कर चला गया। वे कहते हैं, “आरोपी गिरफ्तार हो गए, लेकिन मुझे नहीं लगता कि अर्जुन और उसका परिवार अब कभी गांव लौट पाएगा।”
DFO बोले- चिह्नित लोगों पर FIR की तैयारी
गुना डीएफओ अक्षय राठौर का कहना है- हमने कुछ कब्जाधारियों और खरीदारों को चिह्नित कर लिया है। उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए पत्र लिखा जा चुका है। इस गंभीर मामले को लेकर कलेक्टर और एसपी को अवगत कराया गया है। जल्द ही टास्क फोर्स इस पर कड़ा एक्शन लेगी।



