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    मानव सेवा को समर्पित संस्था “जनसंवेदना” का अनूठा कार्य

    मानव सेवा को समर्पित संस्था “जनसंवेदना” का अनूठा कार्य

    21 वर्षों से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर मानवता की मिसाल पेश कर रहे आर.एस. अग्रवाल

    भोपाल। समाज सेवा के क्षेत्र में कई संस्थाएं कार्य कर रही हैं, लेकिन “जनसंवेदना” संस्था ने मानवता की ऐसी मिसाल कायम की है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन चुकी है। संस्था के अध्यक्ष एवं राज्यस्तरीय अधिमान्य पत्रकार आर.एस. अग्रवाल पिछले 21 वर्षों से निरंतर समाज सेवा में जुटे हुए हैं।

    संस्था द्वारा अब तक 10 हजार से अधिक लावारिस एवं अनाथ शवों का अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। नगर निगम या प्रशासन से जैसे ही सूचना मिलती है, संस्था की टीम तुरंत सेवा में पहुंच जाती है। संस्था द्वारा अंतिम संस्कार के लिए विशेष वाहन एवं बर्फ फ्रीजर बॉक्स की सुविधा भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को कठिन समय में सहारा मिल सके।

    प्रश्न : आपकी संस्था किन-किन कार्यों में सेवा दे रही है?

    आर.एस. अग्रवाल : हमारी संस्था “जनसंवेदना” पूरी तरह मानव सेवा को समर्पित है। हम लावारिस शवों के अंतिम संस्कार, बेसहारा लोगों को भोजन एवं वस्त्र वितरण, गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग और शांति वाहन एवं फ्रीजर बॉक्स की 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराते हैं।

    प्रश्न : आपने यह सेवा कार्य कब शुरू किया?

    आर.एस. अग्रवाल : लगभग 21 वर्ष पहले हमने यह सेवा कार्य शुरू किया था। शुरुआत छोटी थी, लेकिन लोगों के सहयोग और भगवान की कृपा से आज संस्था हजारों जरूरतमंदों तक पहुंच रही है।

    प्रश्न : लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का कार्य कैसे होता है?

    आर.एस. अग्रवाल : नगर निगम, पुलिस या अस्पताल से सूचना मिलने पर हमारी टीम तुरंत पहुंचती है। हम शव को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार के लिए ले जाते हैं। यदि जरूरत हो तो फ्रीजर बॉक्स की व्यवस्था भी करते हैं। हमारा प्रयास रहता है कि किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ हो।

    प्रश्न : अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद आपने कौन-सी नई पहल शुरू की?

    आर.एस. अग्रवाल : वर्ष 2022 में अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर स्थापना के बाद हमने भोपाल में एक नई पहल शुरू की। हमारी संस्था में जो भी व्यक्ति आता है, हम उसे भगवान श्रीराम मंदिर की फोटो भेंट कर सम्मानित करते हैं। इससे लोगों में धार्मिक और सामाजिक भावनाओं का विकास होता है।

    प्रश्न : समाज से आपको कितना सहयोग मिलता है?

    आर.एस. अग्रवाल : समाज के लोगों का हमें लगातार सहयोग मिलता है। कई लोग आर्थिक सहायता करते हैं, तो कई लोग सेवा कार्यों में स्वयं शामिल होकर मदद करते हैं। यही सहयोग हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

    प्रश्न : आपका आगे का लक्ष्य क्या है?

    आर.एस. अग्रवाल : हमारा लक्ष्य है कि कोई भी बेसहारा व्यक्ति खुद को अकेला महसूस न करे। हम मानव सेवा के कार्यों को और अधिक विस्तार देना चाहते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक मदद पहुंच सके।

    संस्था “जनसंवेदना” आज भोपाल में मानव सेवा का एक बड़ा नाम बन चुकी है। आर.एस. अग्रवाल और उनकी टीम का यह समर्पण समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।

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