जबलपुर के बरगी क्रूज हादसे में सिस्टम की लापरवाही से 13 जानें चली गईं। प्राथमिक जांच में खराब मौसम के अलर्ट की अनदेखी को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। हद तो ये है कि मृतकों के शव की भी दुर्दशा की जा रही है।
हादसे में जान गंवाने वाले आर्डनेंस फैक्ट्री के कर्मचारी कामराज आर और उनके 5 साल के बेटे श्रीतमिल का शव ले जाने से फ्लाइट ऑपरेटर ने मना कर दिया। तर्क दिया कि बॉडी डी-कंपोज हो रही हैं। बदबू आ रही है। ऐसे में वह इन्हें नहीं ले जा सकता है।
इसका पता लगते ही प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हुए और ऑपरेटर को समझाकर शव फ्लाइट में रखवाए। इसकी वजह से फ्लाइट ने अपने निर्धारित समय से एक घंटे देरी से उड़ान भरी।

पहले जानिए, हादसा कैसे हुआ…

मौसम खराब होने के कारण रविवार को नहीं भरी उड़ान
जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग का क्रूज डूबा था। इसमें सवार 13 टूरिस्ट की मौत हो गई। उसी दिन 30 अप्रैल को 4 शव, एक मई को 5, दो मई को 2 और तीन मई को दो शव तैरते मिले। मृतकों में 4 बच्चे और 8 महिलाएं शामिल हैं। 28 लोगों को बचा लिया गया था।
श्रीतमिल का शव दो मई को मिला था जबकि कामराज की लाश 3 मई की सुबह मिली। रविवार शाम को ही कामराज और श्रीतमिल का शव लेकर खमरिया अस्पताल से एम्बुलेंस डुमना एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई। रांझी पहुंचने पर जानकारी मिली कि त्रिची का मौसम खराब है, विमान लैंड नहीं कर पाएगा। इस पर एम्बुलेंस वापस अस्पताल आ गई और दोनों शव मरचुरी में रखवा दिए गए।
ऑपरेटर ने कहा- बदबू आ रही है, बॉडी नहीं ले जा सकता
आर्डनेंस फैक्ट्री में कामराज के सहकर्मी सुरेश कन्ना ने दैनिक भास्कर को बताया- सोमवार सुबह 6 बजे तय समय पर एम्बुलेंस से शव लेकर डुमना एयरपोर्ट पहुंच गए थे। साढ़े 7 बजे जेट सर्व एविएशियन कंपनी का चार्टेड प्लेन आया। इसे मध्य प्रदेश सरकार ने हायर किया था।
जैसे ही बॉडी उसमें रखी गईं, फ्लाइट ऑपरेटर ने कहा कि शवों से बदबू आ रही है, ऐसे में उनको नहीं ले जाया जा सकता।
मामले की जानकारी कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को लगी तो उन्होंने रांझी एसडीएम मोनिका वाघमारे और तहसीलदार आदर्श जैन को एयरपोर्ट भेजा। उन्होंने स्प्रे की व्यवस्था की। दोनों शवों की दोबारा कॉफिन में टेपिंग की गई। इसके बाद करीब 9 बजे फ्लाइट त्रिची के लिए रवाना हो सकी।
परिवार के 3 सदस्यों की मौत, केवल बड़ा बेटा ही बचा
कामराज मूलत: तमिलनाडु में त्रिची के रहने वाले थे। 2010 में आर्डनेंस फैक्ट्री में उनकी जॉब लगी। परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे थे। क्रूज हादसे में कामराज का सिर्फ बड़ा बेटी पूवीथरन ही बचा है।



